मध्य प्रदेश में मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल का प्रभाव
केंद्र सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के विरुद्ध देशभर में हुई ट्रेड यूनियन हड़ताल का असर मध्य प्रदेश के रक्षा संस्थानों में भी देखा गया। राज्य की छह ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों सहित सेना के महत्वपूर्ण विभागों में तैनात लगभग 25 हजार सिविलियन कर्मचारियों ने एक घंटे की प्रतीकात्मक हड़ताल कर अपने असंतोष का इजहार किया। यह हड़ताल पूरे दिन चली, और इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध करना था, जिन्हें यूनियनों ने मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और देश-विरोधी बताया है।
सैनिक और सिविलियन कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन
एडिफ (AIDEF) के अध्यक्ष एस एन पाठक ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि मध्य प्रदेश की छह ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप, सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज में तैनात 25,000 से अधिक सिविलियन कर्मचारियों ने विरोधस्वरूप एक घंटे की देरी से ड्यूटी शुरू की। उन्होंने कहा कि पूरे दिन की हड़ताल संभव नहीं थी क्योंकि डिफेंस प्रोडक्शन और उससे जुड़ी सेवाएं अत्यंत आवश्यक हैं। सुबह 8 बजे की बजाय कर्मचारियों ने 9 बजे ड्यूटी शुरू की, और कई जगहों पर यूनियनों से जुड़े कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
देशव्यापी समर्थन और मुख्य मांगें
सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम ने दावा किया है कि इस आंदोलन में लगभग 30 करोड़ श्रमिकों ने भाग लिया। इनकी मुख्य मांगों में चार लेबर कोड और नियमों को निरस्त करना, ड्राफ्ट सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को वापस लेना, साथ ही सस्टेनेबल हार्नेसिंग और न्यूक्लियर एनर्जी के विकास के लिए SHANTI एक्ट को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा, यूनियनें MGNREGA को पुनः शुरू करने और विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट 2025 को समाप्त करने की भी मांग कर रही हैं। यह हड़ताल भारत के प्रमुख ट्रेड यूनियनों जैसे INTUC, AITUC, HMS, CITU का समर्थन प्राप्त है।











