छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला
छिंदवाड़ा जिले में जहरीली कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई है। शुरुआती जांच में केवल Coldrif सिरप को मानक के अनुरूप नहीं पाया गया था, लेकिन अब पता चला है कि कुल चार प्रकार की सिरप में गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन हुआ है।
तमिलनाडु सरकार की आंतरिक रिपोर्ट ने इस मामले में निर्माता कंपनी की गंभीर लापरवाही और अवैध गतिविधियों का खुलासा किया है। मध्य प्रदेश सरकार की जांच में Coldrif सिरप के अलावा तीन अन्य सिरप में भी गड़बड़ी पाई गई है, जिनमें तय मात्रा से अधिक डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया है।
सिरप बनाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी
मध्य प्रदेश में Coldrif सिरप पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही, राज्य सरकार जल्द ही गुजरात की उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जिन्होंने Respifresh TR और Relife सिरप में मानक से अधिक DEG पाया गया है। इन दोनों सिरप का उत्पादन गुजरात की कंपनियों ने किया है।
इसके अलावा, Defrost Cyrup के बैच नंबर 11198 को तुरंत बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया गया है। तमिलनाडु की 26 पन्नों की रिपोर्ट में भी सिरप बनाने वाली कंपनी मेसर्स श्रीसन फार्मास्युटिकल्स की लापरवाही और अवैध गतिविधियों का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट में प्रमुख खामियों का खुलासा
तमिलनाडु सरकार की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कंपनी में गंदगी के बीच सिरप का निर्माण किया जा रहा था। साथ ही, कंपनी के पास आवश्यक मशीनरी, कुशल कर्मचारियों और सुविधाओं की भारी कमी थी। जांच में 350 से अधिक खामियां पाई गईं, जिन्हें ‘क्रिटिकल’ और ‘मेजर’ श्रेणियों में रखा गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सिरप में इस्तेमाल होने वाला प्रोपलीन ग्लाइकॉल और डाईएथनील ग्लाइकॉल (DEG) दोनों पाए गए। कंपनी ने बिना चालान के 50-50 किलो प्रोपलीन खरीदा, जो अवैध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ते विकल्प के रूप में औद्योगिक DEG का प्रयोग किया गया, जो मानव शरीर के लिए अत्यंत खतरनाक है। DEG प्रोपलीन ग्लाइकॉल की तुलना में कहीं अधिक विषैला होता है, जिससे बच्चों की मौत जैसी घटनाएं हो रही हैं।










