दुनिया के संकटों में भारत की भूमिका
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अनेक चुनौतियों का सामना कर रही दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित ‘जीवन उत्कर्ष महोत्सव’ में यह बात कही। उन्होंने बताया कि विश्व के कई देश भारत की स्थिरता और सांस्कृतिक मूल्यों को देखकर समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और धर्म के मार्ग पर अडिग रहकर ही विश्व के संकटों का सामना कर सकता है।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विश्व में उसकी भूमिका
मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक परंपरा है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की ओर इसलिए देख रही है क्योंकि यहाँ की संस्कृति नैतिकता और सद्गुणों पर आधारित है। जब समाज में सद्भाव और एक-दूसरे के प्रति गहरी समझ होती है, तभी शांति और समृद्धि संभव है। भारत का यह सांस्कृतिक आधार ही विश्व के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
सांस्कृतिक मूल्यों का महत्व और नैतिक आचरण
आरएसएस प्रमुख ने इस अवसर पर संस्कृति के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृति का अर्थ सामान्य भाषा में नैतिक और सद्गुणी व्यवहार है। जब लोग अपने बीच सद्भावना और गहरे संबंध बनाते हैं, तभी समाज में शालीनता और सौहार्द्र का वातावरण बनता है। मोहन भागवत का मानना है कि यह नैतिकता ही समाज को मजबूत बनाती है और विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाती है।











