मध्य प्रदेश विधानसभा में गंदे पानी से मौतों का हंगामा
मध्य प्रदेश की विधानसभा में गुरुवार को विपक्षी कांग्रेस ने इंदौर में गंदे पानी के कारण हुई मौतों को लेकर जोरदार हंगामा किया और दो मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठाई। सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि इस संकट में कुल 22 लोगों की जान गई है।
मृतकों की संख्या और सरकार का बयान
पिछले महीने हाई कोर्ट को सौंपी गई ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में भाजपा सरकार ने दावा किया था कि दिसंबर 2025 में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी के सेवन से 16 लोगों की मृत्यु हुई। हालांकि, कांग्रेस का तर्क है कि मृतकों की संख्या 35 तक पहुंच गई है। इस विवाद के कारण सदन में हंगामा बढ़ गया, जिससे स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
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विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस घटना को सरकार की नाकामी बताया और शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में गंदे पानी के कारण 35 लोगों की मौत हो चुकी है, और इन मंत्रियों को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही, मृतकों के परिजनों को दिए गए 2-2 लाख रुपये के मुआवजे को भी पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि इसे बढ़ाकर कम से कम 4 लाख रुपये करने की मांग की गई।
विधानसभा में मौजूद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह मामला राजनीति से ऊपर है और इसमें कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि दोषी पाए गए एक वरिष्ठ अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है, और सरकार मुआवजे को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद, विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे, जिससे सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। जब कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए स्पीकर के पास पहुंच गए। अंत में, हंगामे के कारण सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।











