मध्य प्रदेश में किसान कर्ज माफी पर राजनीतिक विवाद तेज
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने हाल ही में एक विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कमलनाथ सरकार के दौरान की गई किसानों की कर्ज माफी फर्जी थी। इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सारंग का दावा है कि उस समय फर्जी किसानों को कर्ज माफ किया गया, जिससे राज्य की सहकारी बैंकों पर भारी बोझ पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार इस समस्या को हल करने के लिए प्रयासरत है और आने वाले दो वर्षों में बैंकों की स्थिति में सुधार होगा।
कमलनाथ सरकार पर आरोप और किसान कर्ज माफी का इतिहास
2018 में जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए, उस समय कांग्रेस की सरकार बनी थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। उस सरकार का कार्यकाल केवल 15 महीने का रहा, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। इस दौरान, किसानों की कर्ज माफी सबसे प्रमुख चर्चा का विषय बनी रही। कांग्रेस का दावा है कि सरकार ने दो चरणों में लगभग 27 लाख किसानों का करीब 11647 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया। इसके बावजूद, बीजेपी नेता अक्सर इस योजना को फर्जी और झूठा बताते रहे हैं।
सारंग और कमलनाथ के बीच ताजा टकराव
मंत्री विश्वास सारंग ने अपने बयान में कहा कि फर्जी किसानों की कर्ज माफी का बोझ सहकारी बैंकों पर पड़ा, और वर्तमान सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इसके जवाब में, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत सूची साझा की, जिसमें बताया कि किन-किन जिलों में कितने किसानों का कर्ज माफ किया गया है। उन्होंने सारंग से माफी मांगने की भी मांग की है। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है और वादे पूरे नहीं किए। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी अपने चुनावी वादों को निभाए, तो प्रदेश के बाकी किसानों का भी कर्ज माफ किया जा सकता है।











