मध्यप्रदेश में सरकारी बंगलों पर कब्जा हटाने की नई नीति लागू
मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बावजूद, कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों का सरकारी आवास छोड़ने का सिलसिला अभी भी जारी है। अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पद से हटने के बाद सरकारी बंगले खाली करना अनिवार्य है। यह निर्देश सभी के लिए समान रूप से लागू है, चाहे वह पार्टी का बड़ा नेता हो या कोई अन्य अधिकारी।
संपदा संचालनालय ने उन सभी पूर्व मंत्रियों, सांसदों और आईएएस अधिकारियों को नोटिस भेजे हैं, जिन्होंने अपनी पात्रता समाप्त होने के बाद भी सरकारी आवासों पर कब्जा बनाए रखा है। इन सभी को जल्द से जल्द बंगला खाली करने का आदेश दिया गया है। विशेष रूप से भोपाल के 74 बंगले क्षेत्र में स्थित बी-टाइप आवास के पूर्व मंत्री स्वर्गीय प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक का नोटिस जारी किया गया है। यदि समय पर बंगला खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन बलपूर्वक कब्जा हटाने की कार्रवाई करेगा।
पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए
संपदा विभाग ने उन सभी नेताओं और अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने वर्षों से सरकारी आवासों पर कब्जा कर रखा है। इनमें पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया शामिल हैं, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी अपने सरकारी बंगले नहीं छोड़े हैं। इसी तरह, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने चुनाव न लड़ने के बावजूद अपने आवास में रहना जारी रखा है। ये बंगले भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित हैं।
कानूनी प्रावधान और जुर्माने की घोषणा
विधि विभाग ने सख्त नियमों को मंजूरी दी है। नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति तीन महीने तक बंगला खाली नहीं करता है, तो उसे सामान्य किराए का दस गुना और छह महीने के बाद तीस गुना अधिक जुर्माना देना पड़ेगा। इसका मतलब है कि यदि समय पर आवास खाली नहीं किया गया, तो भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा।
सिर्फ नेताओं ही नहीं, बल्कि आईएएस अधिकारियों जैसे सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह को भी सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस भेजा गया है। यह कदम सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है, ताकि सरकारी संपत्ति का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके और अनावश्यक कब्जे समाप्त किए जा सकें।











