पश्चिम एशिया में तनाव का प्रभाव भारतीय बासमती चावल पर
पश्चिम एशिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव और इज़राइल-ईरान के बीच जारी टकराव का असर अब मध्यप्रदेश के बासमती चावल कारोबार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। खासतौर पर रायसेन और नर्मदापुरम जिलों से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले करोड़ों रुपये मूल्य के बासमती चावल को इन दिनों खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
समुद्री मार्गों में बाधा और शिपमेंट रुकावट का असर
दरअसल, समुद्री रास्तों में आई बाधाओं और शिपमेंट रुकावट के कारण माल या तो बंदरगाहों पर ही फंसा हुआ है या फिर स्थानीय मिलों और गोदामों में जमा है। वर्तमान स्थिति ऐसी है कि व्यापारी नए माल की खरीद से भी बच रहे हैं, जिससे स्टॉक का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि सामान्य दिनों में रायसेन और नर्मदापुरम से रोजाना लगभग 20 टन बासमती चावल खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और कुवैत को निर्यात किया जाता था। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है। कई शिपमेंट रोक दिए गए हैं और कुछ माल बंदरगाहों पर ही अटक गए हैं। इसका सीधा असर स्थानीय चावल मिलों और व्यापारियों पर पड़ रहा है।
बढ़ता हुआ स्टॉक और निर्यात में रुकावटें
गोदामों में स्टॉक की मात्रा बढ़ती जा रही है क्योंकि निर्यात गतिविधियों में बाधा आई है। रायसेन में चावल मिल के मालिक सचिन वर्मा ने बताया कि समुद्री परिवहन पर युद्ध का बड़ा प्रभाव पड़ा है, और शिपिंग कंपनियां इस दौरान प्रति कंटेनर 2000 से 2500 डॉलर का वॉर टैरिफ लगा रही हैं, जिसे तत्काल हटाना चाहिए। वहीं, प्रांजल मालानी जैसे व्यापारियों ने भी बताया कि एमपी का लगभग 4 लाख टन का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। जब पुराना माल ही नहीं जा रहा है, तो नया माल कौन खरीदेगा? इससे न केवल निर्यात प्रभावित हो रहा है, बल्कि चावल की कीमतें भी गिरने लगी हैं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण कई क्षेत्रों में असर पड़ा है और युद्ध जितनी जल्दी समाप्त हो जाए, उतना ही स्थिरता और आर्थिक सुधार संभव है। उल्लेखनीय है कि रायसेन जिले का बासमती चावल देश-विदेश में अपनी खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी खास वजह यहां की उपजाऊ मिट्टी और नर्मदा नदी का पानी है। इन प्राकृतिक संसाधनों के कारण यहां का बासमती लंबा, पतला और सुगंधित होता है, जो खाड़ी देशों के बाजारों में बहुत मांग में रहता है।










