मध्य प्रदेश में तेंदुओं की बढ़ती मौतें चिंता का विषय
मध्य प्रदेश में तेंदुओं की मृत्यु दर तेजी से बढ़ रही है, जिससे राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक आरटीआई (RTI) के खुलासे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पिछले 14 महीनों में कुल 149 तेंदुओं की मौत हो चुकी है, जो वन विभाग की कार्यक्षमता और संरक्षण रणनीतियों पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाता है। इस आंकड़े ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के गुस्से को भी भड़का दिया है।
तेंदुओं की मौत के कारण और संरक्षण प्रयास
मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि 24 प्रतिशत तेंदुओं की मौत बुढ़ापे और बीमारियों से हुई है, जबकि 21 प्रतिशत मौतें आपसी संघर्ष का परिणाम हैं। इसके अलावा 14 प्रतिशत तेंदुए शिकार या बदले की घटनाओं में मारे गए हैं। बिजली के करंट से 8 तेंदुए मारे गए, फंदों में फंसे 2 तेंदुए भी मृत पाए गए हैं, और करीब 9 प्रतिशत मामलों में मौत का कारण अज्ञात है।
वन विभाग का दावा है कि वे तेंदुओं की मृत्यु दर को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि विभाग एक विशेष रोडमैप के तहत काम कर रहा है, ताकि इन जानवरों की संख्या सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी बताया कि तेंदुए आकार में छोटे होते हैं और आसानी से नजर नहीं आते, इसलिए वे पूरे प्रदेश में इंसानी बस्तियों के करीब पाए जाते हैं।
सुरक्षा उपाय और चुनौतियां
वन विभाग ने तेंदुओं की मौत को रोकने के लिए नई सड़कें बनाने के साथ ही जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ते, चेतावनी संकेत और नियमित गश्त जैसे कदम उठाए हैं। विभाग का मानना है कि सड़कों के किनारे पानी के स्रोत न बनाना जरूरी है, ताकि जानवर पानी की तलाश में सड़क पर न आएं और दुर्घटना से बच सकें।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि 4000 तेंदुओं में से 149 की मौत को सामान्य माना जा सकता है, जो कुल संख्या का लगभग 4 प्रतिशत है। उनका तर्क है कि ‘कैट फैमिली’ में सालाना 10 से 20 प्रतिशत तक का नुकसान सामान्य बात है।
वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ता और संरक्षण विशेषज्ञ कहते हैं कि मध्य प्रदेश में तेंदुओं की रिकॉर्ड-तोड़ मौतें एक गंभीर समस्या को उजागर करती हैं। उनका आरोप है कि NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के प्रोटोकॉल का पालन न होना और सुरक्षित रास्तों का अभाव इन जानवरों की मौत का मुख्य कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि हादसों के अलावा बिजली के झटकों और लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका मानना है कि वन विभाग और NTCA की लापरवाही इन तेंदुओं के जीवन के लिए खतरा बन चुकी है।










