कोलकाता के सरकारी डेंटल हॉस्पिटल में अद्भुत चिकित्सा सफलता
कोलकाता के एक सरकारी डेंटल अस्पताल के चिकित्सकों ने ऐसी असाधारण उपलब्धि हासिल की है, जो देश और विदेश के कई बड़े अस्पतालों में भी संभव नहीं हो पाई थी। लगभग 912 दिनों से खुले मुंह के साथ जीवन बिताने को मजबूर एक नाबालिग लड़की अब आखिरकार अपने मुंह को बंद करने में सक्षम हो रही है।
मामले की जटिलता और इलाज का तरीका
यह बच्ची करीब दस वर्ष की उम्र की थी, जब उसे एक ऐसी दुर्लभ बीमारी का सामना करना पड़ा, जिसने उसके जबड़े और चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इस कारण वह लगभग तीन वर्षों से अधिक समय तक अपने मुंह को बंद नहीं कर सकी। विभिन्न अस्पतालों में इलाज के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अंततः, आर अहमद डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उसकी स्थिति का गहराई से परीक्षण किया और फिर सफलतापूर्वक उसका उपचार किया।
विशेष चिकित्सा प्रक्रिया और परिणाम
डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को एक अत्यंत जटिल ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल विकार, एक्यूट डिसेमिनेटेड एन्सेफेलोमाइलाइटिस (ADEM) से पीड़ित पाया गया, जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला करता है। लंबे समय तक मुंह खुला रहने के कारण उसके दांत असामान्य रूप से ऊपर की ओर बढ़ गए थे, जिसे सुप्रा-इरप्शन कहा जाता है। इससे मुंह का सूखना, जबड़े का असंतुलन और संक्रमण का खतरा बढ़ गया था। चिकित्सकों ने एक विशेष मेडिकल बोर्ड की मदद से विस्तृत जांच के बाद तय किया कि मुंह को बंद करना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रक्रिया में पीछे के दांतों को निकालना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प था। हाल ही में सफलतापूर्वक किए गए इस ऑपरेशन के बाद, लड़की अब अपने मुंह को बंद कर पाने में सक्षम हो गई है। यह उपचार न केवल दांतों के खराब होने से बचाएगा, बल्कि मुंह के संक्रमण के खतरे को भी कम करेगा। साथ ही, ADEM का इलाज भी जारी है।











