खरगोन के निजी स्कूल की लापरवाही से छात्रों का भविष्य खतरे में
खरगोन जिले के एक निजी स्कूल में हुई अनियमितता के कारण 23 छात्रों का शैक्षिक भविष्य संकट में फंस गया है। स्कूल ने परीक्षा फीस तो ली, लेकिन उसे समय पर बोर्ड को नहीं भेजा, जिसके चलते 12वीं कक्षा के दस छात्र अंग्रेजी का पहला पेपर नहीं दे सके। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मंडल को पत्र लिखकर इन छात्रों को आगामी परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें और मांगें
छात्रों का कहना है कि उन्हें परीक्षा से एक दिन पहले ही पता चला कि उनकी फीस जमा नहीं हुई है। 12वीं के छात्र पीयूष दिलावरे ने बताया कि वह जेईई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अंग्रेजी का पेपर नहीं दे सके। उनका मानना है कि यदि उन्हें फिर से मौका नहीं मिला, तो उनका एक साल बर्बाद हो सकता है। वहीं, नीट की तैयारी कर रही छात्रा उज़्मा खान ने कहा कि एक साल की मेहनत के बाद परीक्षा से वंचित होना बहुत दुखद है। उन्होंने बोर्ड से आगे की परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति की मांग की है।
स्कूल प्रबंधन की गलती और प्रशासन का कदम
अभिभावकों का आरोप है कि उन्होंने समय पर फीस जमा कर दी थी, फिर भी उनके बच्चों को परीक्षा से वंचित होना पड़ा। कई अभिभावकों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल से विशेष अनुमति देने की अपील की है। घटना के बढ़ते विवाद के बाद जिला शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र ने स्वीकार किया कि स्कूल ने 23 छात्रों की फीस निर्धारित समय सीमा में नहीं भेजी थी। मंडल ने देर से फीस स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अब प्रशासन ने मंडल सचिव को पत्र लिखकर इन छात्रों को परीक्षा में भाग लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया है, साथ ही स्कूल की मान्यता रद्द करने की भी सिफारिश की गई है।











