खरगोन में तोतों की अचानक मौत से हड़कंप मचा
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे अज्ञात कारणों से लगभग 150 तोतों की मौत ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। इस घटना का मुख्य कारण फूड पॉइजनिंग माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच कर रहे हैं, और पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने विसरा सैंपल भोपाल और जबलपुर (Bhopal and Jabalpur) की लैब में भेजा है।
मृतकों की संख्या और जांच प्रक्रिया
यह मामला जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर बड़वाह का है। नर्मदा नदी पर बने एक्वाडक्ट पुल के पास पिछले तीन दिनों में करीब 150 तोतों की मौत हो चुकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पशु चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि इन पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू (Bird Flu) से नहीं, बल्कि भोजन में विषाक्तता और गलत खानपान के कारण हुई है। मृतकों में से कुछ तोते रेस्क्यू के दौरान जिंदा भी पाए गए थे, लेकिन फूड पॉइजनिंग का प्रभाव इतना गहरा था कि वे भी कुछ ही समय में दम तोड़ गए।
मौके का निरीक्षण और विशेषज्ञ राय
पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ जीएस सोलंकी ने कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मृत पक्षियों का निरीक्षण करने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि मामला बर्ड फ्लू का नहीं, बल्कि भोजन में विषाक्तता का है। विसरा सैंपल भोपाल और जबलपुर की लैब में भेजा गया है, रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट हो सकेगा।
डॉ मनीषा चौहान ने पोस्टमार्टम के दौरान पाया कि मृत तोतों में फूड पॉइजनिंग के लक्षण स्पष्ट थे। उन्होंने बताया कि पक्षियों को अक्सर खेतों में कीटनाशक के बाद दाना चुगने का मौका मिल जाता है, जो जानलेवा हो सकता है। पेट में चावल, छोटे पत्थर और कंकड़ पाए गए हैं, जो खाने में गड़बड़ी का संकेत हैं। इन पक्षियों में बर्ड फ्लू जैसे लक्षण नहीं पाए गए हैं।
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट टोनी शर्मा ने आशंका जताई है कि पुल पर आने वाले लोगों द्वारा डाले गए गलत भोजन ही इस घटना का कारण हो सकता है। उन्होंने जनता से अपील की है कि पक्षियों को केवल कच्चे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा और गेहूं ही खिलाएं। पका हुआ, मसालेदार या बचा हुआ भोजन पक्षियों के लिए जहर साबित हो सकता है।











