मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जल संरक्षण पुरस्कार को लेकर विवाद
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को हाल ही में राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में तीव्र बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जिले के प्रशासन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर बनाई गई तस्वीरों का सहारा लेकर पुरस्कार प्राप्त किया है। इस आरोप के बाद खंडवा जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन तस्वीरों का पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है।
प्रशासन का जवाब: पुरस्कार का आधार तस्वीरें नहीं, कार्य हैं
खंडवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नागार्जुन बी गौड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कार के लिए भेजी गई तस्वीरें AI से नहीं बनाई गई थीं। उन्होंने बताया कि ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान के तहत किए गए 1 लाख 29 हजार 46 कार्यों की जांच के बाद ही इन तस्वीरों को वेरिफाई कर पोर्टल पर अपलोड किया गया। गौड़ा ने यह भी कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इन तस्वीरों की सत्यता की पुष्टि की है और रैंडम फील्ड इंस्पेक्शन भी किया गया है।
सत्यता को लेकर उठ रहे सवाल और प्रशासन का दावा
गौड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर खंडवा जिले में जल संरक्षण के कार्यों को लेकर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ‘कैच द रेन’ नामक पोर्टल पर केवल शैक्षिक और प्रेरणादायक उद्देश्यों के लिए तस्वीरें अपलोड की जाती हैं, न कि पुरस्कार के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि AI से बनाई गई 21 तस्वीरें ‘कैच द रेन’ पोर्टल पर अपलोड की गई थीं, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान के तहत किए गए कार्य ही पुरस्कार का आधार हैं, न कि किसी भी तरह की कृत्रिम तस्वीरें।











