मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में आर्थिक संकट की गहरी छाया
भोपाल के पास स्थित मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में वर्तमान में स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक तेल और ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे स्थानीय फैक्ट्रियों पर भारी दबाव पड़ा है। खासतौर पर पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल पर निर्भर उद्योगों को उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
उत्पादन में भारी गिरावट और मजदूरों की स्थिति
मंडीदीप में सुबह के समय फैक्ट्रियों का माहौल सन्नाटे से भर गया है। पहले जहां तीन शिफ्टों में मशीनें चलती थीं, अब वहां गेट पर ट्रकों की संख्या कम हो गई है। कई यूनिट्स में मशीनें आधी रफ्तार से चल रही हैं, जिससे उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत तक घट गया है। मजदूरों की शिफ्ट कम होने और मजदूरी में कटौती के कारण मजदूर चौक पर भीड़ बढ़ गई है।
विदिशा का रहने वाला एक मजदूर बताता है कि पहले उसे रोजाना 600 से 700 रुपए मिलते थे, लेकिन अब केवल 450 रुपए ही मिल पा रहे हैं। कई मजदूरों को उत्पादन में कमी और कच्चे माल की अनुपलब्धता के कारण नौकरी से निकाला जा रहा है। गोलू नामक मजदूर, जो सागर का निवासी है, दो साल से मंडीदीप की एक फैक्ट्री में काम कर रहा था, लेकिन अब उत्पादन घटने और खर्च बढ़ने के कारण वह अपने गांव लौट रहा है।
कमी हो रहे कच्चे माल और रोजगार संकट का असर
पेन फैक्ट्री में उत्पादन में भारी गिरावट आई है। पहले यहां 100 कर्मचारी काम करते थे, अब संख्या घटकर लगभग 50 रह गई है। पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक के दाने कम मिलने के कारण पैकेजिंग का काम भी आधा रह गया है। फैक्ट्री संचालिका पूर्णिमा राजा जैन का कहना है कि ऑर्डर कम होने और लागत बढ़ने के कारण अधिक कर्मचारियों को रखना संभव नहीं है।
लेबर सप्लाई पर भी असर पड़ा है। लेबर ठेकेदार राममणि द्विवेदी बताते हैं कि पहले रोजाना 300 मजदूर सप्लाई होते थे, अब यह संख्या घटकर 150 से 175 के बीच रह गई है। शिफ्ट कम होने और सुरक्षा स्टाफ की जरूरत घटने से रोजगार प्रभावित हो रहा है। मंडीदीप के ऑल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव नीरज जैन का कहना है कि कच्चे माल की आपूर्ति समय पर नहीं हो रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने वाला कच्चा तेल भारत की रिफाइनरियों में जाता है और पेट्रोकेमिकल उत्पादों में परिवर्तित होता है। उत्पादन में कमी के कारण देश के 50 प्रतिशत घरेलू बाजार पर असर पड़ा है। कंटेनर की संख्या भी आधी रह गई है, जिससे निर्यात में गिरावट आई है। खासतौर पर कपड़ा और फैब्रिक का निर्यात प्रभावित हुआ है। मंडीदीप में यह संकट केवल उत्पादन का नहीं है, बल्कि मजदूरों की रोजी-रोटी और जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है। ईरान-इजरायल के युद्ध की मार अब हजारों किलोमीटर दूर मंडीदीप तक पहुंच चुकी है।










