इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से महामारी का खतरा
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी के कारण डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। वर्तमान में इस इलाके में अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 398 पहुंच गई है, जिनमें से 11 को आईसीयू में रखा गया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस संक्रमण के कारण अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
पिछले तीन दशकों में फिर से जागरूकता और सुधार की आवश्यकता
30 साल पहले भी इसी क्षेत्र में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी, जब सुभाष चौक की टंकी में एक मानव कंकाल पाया गया था। उस समय नगर निगम पर कांग्रेस का कब्जा था और महापौर मधुकर वर्मा थे। उस घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया था, और परिणामस्वरूप कई वर्षों तक कांग्रेस का मेयर पद नहीं बन पाया। आज भी स्थिति गंभीर है, और स्वास्थ्य विभाग ने इस संकट से निपटने के लिए कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (NIRBI) की टीम को जांच के लिए बुलाया है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट और सरकार की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में चल रहे सर्वे के दौरान 9,416 लोगों की जांच की गई, जिसमें 20 नए मामले सामने आए हैं। इस क्षेत्र में 2,354 घरों का सर्वेक्षण किया गया, और इन जांचों के दौरान छह मौतें भी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गंदे पानी का स्रोत अभी भी सक्रिय है, और इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने मृतकों की संख्या 10 बताई है, जबकि स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि छह महीने के बच्चे समेत 16 लोग इस महामारी की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं।











