इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौत का नया मामला दर्ज
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के संदर्भ में अब एक नई कानूनी कार्रवाई शुरू हुई है। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
यह परिवाद भागीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने वकील दिलीप नागर के माध्यम से प्रस्तुत किया है। याचिका में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों से यहां के लोग गंदे पानी का सेवन कर रहे हैं। 2024 में एक युवती की दूषित पानी पीने से मौत हो गई थी। इसके बाद नर्मदा पाइपलाइन बदलने का नोटिस जारी हुआ था, और टेंडर भी हो चुके थे। लेकिन तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने इन टेंडरों को रोक दिया। बाद में निगमायुक्त दिलीप यादव ने भी इन टेंडरों को मंजूरी नहीं दी। लगातार लोगों की बीमारियों और मौतों के बाद 30 दिसंबर को यह टेंडर स्वीकृत किया गया। यदि यह समय पर हो जाता, तो संभवतः इतनी जानें नहीं जातीं।
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज
रामू सिंह के वकील ने बताया कि उन्होंने बाणगंगा थाने में तत्कालीन निगमायुक्त, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और जल कार्य अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था। पुलिस ने आवेदन स्वीकार नहीं किया, इसलिए कोर्ट का सहारा लिया गया। कोर्ट ने 24 जनवरी तक पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
साथ ही, वकील ने यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया जाए। सरकार ने इन अधिकारियों की पदोन्नति भी कर दी है, जो इस गंभीर मामले को और भी जटिल बनाता है।
अधिकारियों की लापरवाही से हुई मौतों पर न्याय की मांग
इस पूरे प्रकरण में यह स्पष्ट है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी के कारण कई लोगों की जान गई है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं, ताकि दोषियों को सजा मिल सके। जनता में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है, और न्याय की उम्मीद जगी है।











