इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट गहरा रहा है
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी के कारण हुई तबाही अब एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा का रूप ले चुकी है। प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों के बयानों में विरोधाभास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जहां स्वास्थ्य विभाग अभी भी चार मौतों का ही जिक्र कर रहा है, वहीं मेयर ने स्वीकार किया है कि मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। मेयर का दावा है कि उन्हें दस लोगों की मौत की जानकारी मिली है।
मृतकों की संख्या को लेकर प्रशासन और मेयर के बीच मतभेद
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस स्वास्थ्य संकट के कारण छह महीने के बच्चे सहित कुल 14 लोग जान गंवा चुके हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। भार्गव ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा, “स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार भागीरथपुरा में डायरिया से चार लोगों की मौत हुई है, लेकिन मुझे इस बीमारी से दस मौतों की जानकारी मिली है।” इस बीच, इलाके में हैजा फैलने की आशंका भी जताई जा रही है।
हैजा की आशंका और पानी की गुणवत्ता का परीक्षण
भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर, मेयर ने कहा कि इस मामले में केवल स्वास्थ्य विभाग ही सही जानकारी दे सकता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी प्रदूषित हो गया था। हालांकि, उन्होंने विस्तृत रिपोर्ट साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हो गया है, जो शौचालय के पास पाया गया।
पिछले नौ दिनों में इस क्षेत्र में 1400 से अधिक लोग उल्टी और डायरिया से प्रभावित हुए हैं। अस्पतालों में 272 मरीजों को भर्ती कराया गया है, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज कर दिया गया है। वर्तमान में 201 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 32 का इलाज इंटेंसिव केयर यूनिट में चल रहा है। स्थिति गंभीर बनी हुई है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए प्रयासरत हैं।










