इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम विवाद का विस्तार
इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान वंदे मातरम को लेकर उत्पन्न विवाद अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है। कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए राष्ट्रगीत गाने से इनकार कर दिया, जिससे राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। इस घटना ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।
मुख्यमंत्री का कड़ा रुख और कांग्रेस पर आरोप
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को कठोर शब्दों में घेरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस को इस स्थिति में अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने दोहरे चरित्र से बाहर नहीं आ पा रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर की महिला पार्षदों ने सीमा पार कर दी है और वंदे मातरम गाने से इनकार कर कांग्रेस की असलियत उजागर हो रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को इस पर स्पष्टता देनी चाहिए कि पार्टी इन तरह के नेताओं का समर्थन क्यों करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस नेता इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं, भाजपा ने इस मुद्दे पर तीव्र प्रतिक्रिया दी है। शहर के विभिन्न वार्डों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। भाजपा कार्यकर्ता पुतला दहन कर राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन कर रहे हैं। नवलखा चौराहे पर भाजपा के नेता मनीष शर्मा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया, जबकि बड़े गणपति चौराहे पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी शामिल हुए। भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज मिश्रा ने कहा कि जो पार्षद वंदे मातरम गाने से इनकार कर रहे हैं, उन्हें अपने पूर्वजों का इतिहास देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे घर वापसी कर सनातन धर्म अपनाना चाहें, तो उनका स्वागत है।











