इंदौर मेट्रो का नया अंडरग्राउंड मार्ग प्रस्तावित
इंदौर के घने आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों से गुजरने वाली 3.3 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन को अब एलिवेटेड कॉरिडोर के बजाय भूमिगत बनाया जाएगा। यह निर्णय शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। राज्य सरकार इस बदलाव के कारण होने वाले लगभग 900 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च को वहन करेगी। मूल योजना के अनुसार, इंदौर मेट्रो का कुल प्रोजेक्ट लागत 7500.8 करोड़ रुपये थी, जिसमें 31.32 किलोमीटर का मार्ग शामिल था।
घनी आबादी वाले इलाकों में मेट्रो निर्माण में आई बाधाएँ
2019 से चल रहे इस मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर शहर के निवासियों ने कई बार विरोध जताया है। खासकर उन इलाकों में जहां आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र बहुत घने हैं, वहां प्रोजेक्ट को लेकर लगातार रुकावटें आ रही हैं। इन इलाकों के लोग अपने दैनिक जीवन और व्यवसायिक गतिविधियों में बाधा का हवाला देते हुए इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव ने रविवार को इंदौर में विकास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान कहा कि अब मेट्रो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भूमिगत किया जाएगा, ताकि ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हो सके और शहर की सुंदरता भी बनी रहे।
मेट्रो परियोजना का विस्तार और नई योजनाएँ
इस निर्णय से मेट्रो परियोजना की कुल लागत में लगभग 800 से 900 करोड़ रुपये का इजाफा होगा, जिसे राज्य सरकार वहन करेगी। खजराना स्क्वायर से रेलवे स्टेशन के बीच 3.3 किलोमीटर का मार्ग अब भूमिगत होगा, जहां पहले एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित था। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तार किया जाएगा, जो अब पश्चिमी मध्य प्रदेश के 14 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैलेगा। इस क्षेत्र में उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जिलों के कुछ हिस्से भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मेट्रो नेटवर्क को व्यापार, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।











