कूनो नेशनल पार्क में पहली मादा चीता मुखी का जीवन संघर्ष और सफलता
देश के पहले चीता पुनर्स्थापन परियोजना के तहत कूनो (Kuno) नेशनल पार्क में जन्मी पहली मादा चीता मुखी ने अपने जीवन के तीन साल पूरे कर लिए हैं। यह चीता भारत में जन्मी पहली मादा चीता के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी है और अब यह परियोजना की मुख्य उम्मीद बन गई है। इस खास अवसर पर कूनो प्रबंधन ने मुखी की जीवन यात्रा और उसके संघर्ष की कहानी को दर्शाने वाली तस्वीरें साझा की हैं। साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर मुखी से जुड़ी खबर को साझा कर अपनी खुशी व्यक्त की है।
मुखी का जन्म और उसकी कठिनाइयों से जूझने की कहानी
मई 2023 में मुखी का जन्म उस समय हुआ जब नामीबिया (Namibia) और साउथ अफ्रीका (South Africa) से लाए गए चीते कूनो में बसाए जा रहे थे। उस समय नए माहौल, मौसम और स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मुखी की मां ज्वाला (Jwala) ने उसे छोड़ दिया था, और उसके भाई-बहन तेज गर्मी के कारण जीवित नहीं रह सके। इन कठिन परिस्थितियों में कूनो की टीम और वेटेरियन ने मुखी का संरक्षण किया और उसकी लगातार निगरानी की। इसी कारण आज वह कूनो पार्क की सबसे मजबूत मादा चीता के रूप में जानी जाती है।
मुखी का विकास और उसकी सफलता की कहानी
मुखी ने अपने शुरुआती दिनों में ही कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन समय के साथ वह एक मजबूत शिकारी बन गई। अब वह स्वस्थ और वयस्क चीता है, जो शिकार करने में माहिर हो चुकी है। वन अधिकारियों के अनुसार, उसका व्यवहार यह दर्शाता है कि कूनो का पर्यावरण चीता प्रजाति के लिए अनुकूल हो रहा है। नवंबर 2025 में, उसने अपने पांच शावकों को जन्म दिया, जो देश में चीता प्रजनन की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत है। मुखी अपने शावकों की देखभाल खुद कर रही है, जो जंगल में टिके रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि मुखी की कहानी पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक मील का पत्थर है। कठिन परिस्थितियों में उसकी जीवित रहने और मां बनने की क्षमता यह दर्शाती है कि कूनो पार्क का इकोसिस्टम चीता के अनुकूल है। कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने कहा कि मुखी का व्यवहार, शिकार करने की क्षमता और अपने शावकों की देखभाल इस परियोजना की सफलता का प्रमाण हैं। इससे स्पष्ट है कि चीते यहां अपने पैर जमा चुके हैं।











