पहली बार इंटर स्टेट टाइगर ट्रांस्लोकेशन का सफल प्रयास
पिछले 24 दिनों से चल रहे जटिल ऑपरेशन का अंत रविवार को सफलता के साथ हुआ। यह भारत में पहली बार हुआ है कि किसी टाइगर का हेलीकॉप्टर के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण किया गया है। यह विशेष प्रक्रिया एमपी (मध्य प्रदेश) के पेंच टाइगर रिजर्व की तीन साल की बाघिन PN-224 को राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने के लिए की गई है। इस कदम का उद्देश्य राजस्थान में बाघों के जीन पूल में सुधार लाना है।
बाघों के जीन पूल में सुधार के लिए रणनीतिक कदम
दरअसल, राजस्थान में पाए जाने वाले अधिकांश बाघ एक ही जीन पूल से संबंधित हैं, जिससे उनकी नस्लें कमजोर हो सकती हैं। इसीलिए, पेंच टाइगर रिजर्व से जीन विविधता बढ़ाने के लिए अलग जीन पूल वाली बाघिन PN-224 को राजस्थान ले जाया गया है। इस प्रक्रिया के तहत, पहले बाघिन का ट्रैकिंग करने के लिए जंगल में 50 कैमरे लगाए गए। राजस्थान से एक विशेष टीम भी सिवनी पहुंची, ताकि बाघिन का पता लगाया जा सके।
बाघिन का ट्रैकिंग और ट्रेंक्युलाइजेशन प्रक्रिया
बाघिन को ट्रैक करने के बाद, हाथी दल की मदद से उसे ट्रेंक्युलाइज कर रेडियो कॉलर लगाया गया। यह प्रक्रिया 5 दिसंबर को पूरी हुई, लेकिन अगले ही दिन बाघिन ने रेडियो कॉलर निकाल दिया। इसके बाद, कुछ दिनों का इंतजार कर फिर से ट्रेंक्युलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। आज, बाघिन को फिर से ट्रैक कर ट्रेंक्युलाइज किया गया और वायुसेना के M-17 हेलीकॉप्टर से राजस्थान भेजा गया। इस ऑपरेशन में मध्य प्रदेश से मिशन लीडर IFS गुरलीन कौर, पेंच के वेटरनरी डॉक्टर अखिलेश मिश्रा सहित चार अधिकारी शामिल थे।











