ग्वालियर में अचानक हुई भयंकर ओलावृष्टि से हड़कंप मच गया
ग्वालियर में शनिवार को सूरज की तीखी किरणें तेज़ तेवर दिखा रही थीं, लेकिन दोपहर के समय ही प्रकृति ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया। अचानक घने बादलों के छा जाने के बाद ऐसी भीषण ओलावृष्टि हुई कि शहर के प्रमुख इलाकों में सफेद चादर जैसी बिछ गई। यह दृश्य देखने में तो आकर्षक था, लेकिन शहर के लिए यह भारी नुकसानदेह भी साबित हुआ।
ओलावृष्टि का प्रभाव और शहर की ऐतिहासिक धरोहरें
ओलों का आकार इतना बड़ा था कि ग्वालियर की शान कहे जाने वाले महाराजा बाड़ा स्थित म्यूजियम की ऐतिहासिक घड़ी ओलों की चोट से टूट गई। साथ ही, एक निजी अस्पताल की बाउंड्री वॉल गिरने से उसके नीचे खड़ी कई कारें दब गईं। इसके अलावा, सीधे ओलों के प्रहार से सड़कों के किनारे और पार्किंग में खड़ी बाइक और कारों के शीशे भी चकनाचूर हो गए।
खेतों और किसानों पर पड़ा ओलावृष्टि का असर
शहर के मुरार, आनंद नगर, बहोड़ापुर, विनय नगर जैसे इलाकों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि वहां सफेद चादर बिछ गई। यह दृश्य कश्मीर जैसी भव्यता का अनुभव कराता था। वहीं, खेतों में खड़ी गेहूं की फसलें इस ओलावृष्टि से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।
मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही शुक्रवार को पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की चेतावनी दी थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर से उठी हवाओं ने जेट स्ट्रीम के सहारे भारत में प्रवेश कर मध्य प्रदेश और राजस्थान में असर दिखाना शुरू कर दिया है। विभाग ने यह भी कहा है कि 7 अप्रैल तक गरज-चमक और ओलावृष्टि का यह सिलसिला जारी रह सकता है। इस साल मार्च में भी पश्चिमी विक्षोभ अधिक सक्रिय रहा, जिसका प्रभाव अब अप्रैल की शुरुआत में भी देखा जा रहा है।











