ग्वालियर के कछुआ गांव में ओलों ने किसानों की फसलें बर्बाद कर दी
ग्वालियर (Gwalior) के कछुआ गांव में आसमान से गिरते ओलों ने किसानों की एक साल की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है। इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिससे उनके आर्थिक नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। जब प्रशासन ने पीड़ित किसानों का मुआवजा और सहायता का आश्वासन देने के लिए पहुंचा, तो वहां का माहौल अपेक्षा के विपरीत था।
प्रशासन और किसानों के बीच तीखी बहस ने बढ़ाई चिंता
मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार पूजा मावई और किसानों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि तहसीलदार खेतों का निरीक्षण करने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी कर वापस लौटना चाहती थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही वह गाड़ी से उतरीं, उन्होंने किसानों को किनारे हटने को कहा। जब किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करनी चाही, तो उन्हें जवाब मिला, ”साइड हो जाओ…साइड हो जाओ… मुझसे बात करने का यह तरीका है?”
किसानों की विनती के बावजूद संवादहीनता बनी समस्या
वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि बुजुर्ग किसान अपनी फसल दिखाने के लिए विनती कर रहे थे, लेकिन संवाद की कमी के कारण स्थिति और बिगड़ गई। किसानों ने कह दिया, ”तो आप वापस जाओ, हमें सर्वे नहीं कराना है।” इस स्थिति को देखते हुए भितरवार SDM राजीव समाधिया खुद कछुआ गांव पहुंचे। उन्होंने न केवल नाराज किसानों को शांत किया, बल्कि नायब तहसीलदार को साथ लेकर खेतों के बीच पहुंचकर सर्वे शुरू करवाया। SDM ने कहा कि कलेक्टर के निर्देशानुसार सर्वे टीम फील्ड में है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधिवत सर्वे के बाद शासन के नियमों के अनुसार अधिकतम मुआवजा दिलाया जाएगा।











