इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें: राजनीतिक विवाद का केंद्र
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी के कारण हुई मौतों ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस घटना पर तीखा हमला बोलते हुए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और इसे “आपराधिक लापरवाही” करार दिया है।
उन्होंने बताया कि इस हादसे में 40 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और अभी भी कई लोग ICU में जीवन के संघर्ष कर रहे हैं। यह वही इंदौर शहर है जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता था।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा, जो “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, अपने सबसे बुनियादी कर्तव्य में असफल रही है: सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना। उन्होंने कहा कि सरकार ने तत्परता और जवाबदेही दिखाने के बजाय अहंकार का प्रदर्शन किया है।
मामले की गंभीरता और सरकार की लापरवाही
पवन खेड़ा ने कहा कि मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दुखी परिवारों का अपमान करते हुए कहा, “फालतू सवाल मत पूछो,” जब वे मुआवजे का इंतजार कर रहे थे। सरकार द्वारा पीड़ितों को केवल दो लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रस्ताव भी उन्होंने तुच्छ बताया, जो मानव जीवन के मूल्य का मजाक उड़ाने जैसा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन परिवारों को सरकार की लापरवाही, अक्षमता और उदासीनता के कारण जीवनभर का दुख झेलना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस मामले की तुरंत जांच हो और प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर संज्ञान ले। साथ ही, उन्होंने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) को भी इस जांच में शामिल करने का सुझाव दिया, ताकि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।
खेड़ा ने कहा कि यह घटना दशकों से चली आ रही सिस्टम की विफलता का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के बावजूद, भाजपा सरकार साफ पेयजल उपलब्ध कराने में बार-बार असफल रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि 2003 और 2008 में भी ADB ने मध्य प्रदेश को अरबों डॉलर का लोन दिया था, जिसमें भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे शहर शामिल थे। इन फंडिंग का उद्देश्य जल आपूर्ति, सैनिटेशन और वेस्ट मैनेजमेंट में सुधार करना था, लेकिन इन जिम्मेदारियों को पूरा करने में सरकार पूरी तरह से फेल रही है।
अंत में, उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रोजेक्ट्स की निगरानी नहीं की गई, रिपोर्ट्स कभी प्रस्तुत नहीं की गईं, और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर अधूरा या गलत तरीके से प्रबंधित किया गया। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिकों के साथ एक बड़ा धोखा है, जो अंतरराष्ट्रीय ऋण की शर्तों का उल्लंघन भी है।
लापरवाही और जिम्मेदारी का सवाल
खेड़ा ने सवाल किया कि जब भाजपा सरकार ने आंखें मूंद रखी थीं, तब शहर के पीने के पानी को सीवेज से दूषित होने से कैसे रोका गया। उन्होंने पूछा कि नागरिकों की बार-बार की चेतावनियों को क्यों नजरअंदाज किया गया, जिससे हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ गई।
उन्होंने पूछा कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा, जब बेगुनाह बच्चे और शिशु मर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों की चुप्पी कैसे जायज ठहराई जा सकती है? यह घटना न केवल प्रशासनिक विफलता का परिणाम है, बल्कि यह सरकार की गंभीर लापरवाही का भी प्रमाण है।











