मध्य प्रदेश में नक्सलवाद पर सरकार की स्पष्ट नीति और कांग्रेस का रवैया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर नक्सलवाद के मुद्दे पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार ने इस समस्या को जड़ से समाप्त कर दिया है। उन्होंने इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि कांग्रेस केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में लगी रहती है और उसकी पिछली सरकारों ने नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या को बढ़ने दिया।
सीएम ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में नक्सलवाद को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान नक्सलवाद राज्य में एक बड़ी चुनौती थी, जिसे हमने पूरी तरह खत्म कर दिया है। मंडला, बालाघाट और डिंडोरी जैसे जिले अब लगभग नक्सल मुक्त हो चुके हैं।” यह जानकारी इस बात का संकेत है कि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी रणनीति अपनाई है।
कांग्रेस का रवैया और नक्सलवाद से संबंधित राजनीतिक विवाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान नक्सलियों ने एक मंत्री की हत्या कर दी थी। उन्होंने बिना दिग्विजय सिंह का नाम लिए कहा, “तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस की नीति और रवैया नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाला था। आज भी माडवी हिडमा की हत्या पर कांग्रेस दुख व्यक्त कर रही है, जो उनके दोहरे रवैये को दर्शाता है।” यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ कठोर कदम उठा रही है और कांग्रेस का समर्थन नहीं कर रही है।
सीएम यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। अपने दो साल के कार्यकाल में उन्होंने महिलाओं, किसानों, युवाओं और कमजोर वर्गों के हित में कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी हो गई है और औद्योगिक विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
आधुनिक विकास और नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति
यादव ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को देश का सबसे विकसित राज्य बनाना है। उन्होंने बताया कि सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिसमें 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की योजना भी शामिल है। इसके तहत अबूझमाड़ में आईटीबीपी का रणनीतिक बेस स्थापित किया गया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और उन्होंने संविधान की प्रतिलिपि लेकर हथियार डाल दिए हैं। इन प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कदम उठा रही है।











