किसानों के लिए सरकार का प्रमुख समर्थन और लाभकारी योजनाएं
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में अपने भाषण के दौरान किसानों को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है। इस दिशा में सरकार ने सरसों और उड़द जैसी फसलों के उत्पादकों के लिए सीधे वित्तीय लाभ का मार्ग खोल दिया है।
इस वर्ष सरसों के क्षेत्रफल में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान मंडी में इसकी कीमत लगभग 6000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सरकार का समर्थन मूल्य 6200 रुपये है। सरकार ने इस 200 रुपये के अंतर को भरने के लिए भावांतर भुगतान योजना शुरू की है, ताकि किसानों को नुकसान न हो।
उड़द और सरसों की फसलों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं
सरकार ने उड़द की फसल को प्रोत्साहित करने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देने का निर्णय लिया है। यह कदम फसल विविधता को बढ़ावा देने और किसानों को नई विकल्पों की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, ग्रीष्मकालीन मूंग की जगह उड़द की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक लाभ हो सके।
मूल्य समर्थन और सरकारी खरीद की योजनाएं
प्रदेश में चना और मसूर की फसलों के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन और मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन फसलों का समर्थन मूल्य 24 मार्च से 30 मई 2026 तक लागू रहेगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय पर अपना पंजीकरण कराएं ताकि उन्हें उचित मूल्य का लाभ मिल सके।











