दतिया में SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
देशभर में SIR (Survey, Investigation, and Registration) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच दतिया (Datia) जिले में एक ऐसा आदेश जारी हुआ जिसने तीव्र विवाद को जन्म दे दिया। इस आदेश में बीएलओ (Block Level Officer) के सहयोगियों की सूची में कुछ नाम भाजपा (BJP) और आरएसएस (RSS) से जुड़े हुए पाए गए। जैसे ही इस मामले का खुलासा हुआ, प्रशासन ने तुरंत ही उस आदेश को रद्द कर दिया।
आदेश में शामिल नामों को लेकर उठे सवाल और विवाद की जड़ें
दरअसल, बीएलओ सहायक की नियुक्ति के लिए जिला प्रशासन ने सभी विभागों से कर्मचारियों की सूची मांगी थी। जब सभी विभागों ने अपनी-अपनी सूचनाएं भेजीं, तो जन अभियान परिषद (Jan Abhiyan Parishad) द्वारा भेजी गई सूची में कुछ अशासकीय सदस्यों के साथ-साथ भाजपा और आरएसएस से जुड़े कुछ नाम भी शामिल पाए गए। इस पर कांग्रेस (Congress) ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मज़ाक करार दिया।
राजनीतिक आरोप और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
दतिया जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक दांगी ने तुरंत ही निर्वाचन आयोग (Election Commission), कलेक्टर और एसडीएम (SDM) को शिकायत भेजी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संगठन से जुड़े व्यक्तियों को बीएलओ के सहयोगी बनाकर मतदाता सूची प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक रंग ले लिया, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के बाद अब प्रशासन भी सत्ता और संगठन की कठपुतली बनकर नाच रहा है। पटवारी ने आरोप लगाया कि दतिया कलेक्टर ने SIR के नाम पर बीएलओ के सहयोगी बनाकर जो आदेश जारी किया है, उसमें कई भाजपा पदाधिकारियों की नियुक्ति सत्ता के दबाव का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार SIR को संवैधानिक प्रक्रिया बताती है, लेकिन असल में इसे पार्टी के एजेंडे को लागू करने का माध्यम बना दिया गया है। यह लोकतंत्र का अपमान है, और कांग्रेस इस चाल को सफल नहीं होने देगी। हम हर मतदाता के अधिकार की रक्षा के लिए सजग हैं।











