भोपाल में ईद से पहले फतवे ने मचाई हलचल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ईद-उल-फितर के अवसर से कुछ ही दिन पहले एक विवादित फतवे ने धार्मिक और सामाजिक माहौल को गर्मा दिया है। जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के दारुल इफ्ता की ओर से जारी इस फतवे में कहा गया है कि प्रोस्टेट (पेशाब संबंधी) रोग से पीड़ित व्यक्ति नमाज का नेतृत्व नहीं कर सकता।
9 मार्च 2026 को नायब मुफ्ती सैयद अहमद खान काश्मी द्वारा जारी इस फतवे में शरई नियमों का हवाला देते हुए लिखा गया है कि यदि किसी को पेशाब टपकने जैसी समस्या है, तो वह खुद नमाज पढ़ सकता है, लेकिन दूसरों को नमाज पढ़ाने का अधिकार नहीं है। हालांकि, इस फतवे में सीधे तौर पर शहर काजी का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसे शहर काजी के खिलाफ माना जा रहा है।
विवाद और विरोध के बीच साजिश का आरोप
जैसे ही इस फतवे का सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने कड़ा विरोध जताया है। कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन बल्ली ने इसे एक साजिश करार देते हुए कहा, “ईद की नमाज में केवल पांच दिन बाकी हैं, और इस समय शहर काजी को हटाने के लिए यह षड्यंत्र रचा जा रहा है। मुफ्ती कौन होते हैं जो इस तरह का फतवा जारी करें? हम इस मामले में शाहजानाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराएंगे।”
इस विवाद के कारण मुस्लिम समुदाय में भारी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक पक्ष का तर्क है कि यह फतवा शरई नियमों की स्पष्टता के लिए है और किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। वहीं, दूसरे पक्ष का मानना है कि इसे शहर काजी की छवि धूमिल करने और उन्हें पद से हटाने की कोशिश माना जा रहा है।
ताजुल मसाजिद में नमाज का भविष्य क्या?
भोपाल की ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में ईद की नमाज बड़ी संख्या में लोग अदा करते हैं। इस विवाद के चलते अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि शहर काजी नमाज नहीं पढ़ाते हैं, तो उनकी जगह कौन इमामत करेगा? इस स्थिति को देखते हुए विभिन्न मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों की बैठक बुलाई गई है, ताकि इस्लाम के नियमों के अनुरूप सर्वसम्मति से निर्णय लिया जा सके।










