इंदौर फैमिली कोर्ट का नारायण साईं और जानकी देवी के तलाक का फैसला
इंदौर की फैमिली कोर्ट ने नारायण साईं और जानकी देवी के बीच तलाक को मंजूरी दे दी है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि नारायण साईं तीन महीने के अंदर जानकी देवी को दो करोड़ रुपये का स्थायी भरण-पोषण राशि भुगतान करें। इस फैसले के पीछे कोर्ट ने पिछले आठ वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का अंत किया है।
2018 से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट का निर्णय
साल 2018 में जब जानकी हरपालानी ने अपने पति नारायण साईं के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी, तब कोर्ट ने उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये का मेंटेनेंस देने का आदेश दिया था। यह आदेश इस आधार पर था कि जब तक मामला कोर्ट में लंबित है, तब तक पत्नी को आर्थिक सहायता मिलती रहे। लेकिन, आठ वर्षों में नारायण साईं ने एक भी रुपये जानकी देवी को नहीं दिए। उनके वकील का कहना है कि बार-बार कानूनी प्रक्रिया के बावजूद, नारायण साईं ने कोई भी भुगतान नहीं किया। उल्लेखनीय है कि नारायण साईं अभी गुजरात (Gujarat) के सूरत जिले की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
जानकी देवी ने लगाए गंभीर आरोप, कोर्ट का फैसला
जानकी देवी ने अपनी याचिका में मानसिक प्रताड़ना समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे और एकमुश्त पांच करोड़ रुपये की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट में अपने दावों का समर्थन करने के लिए दस्तावेजी सबूत भी प्रस्तुत किए। दूसरी ओर, नारायण साईं ने इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जानकी देवी के पक्ष को अधिक मजबूत माना।
करीब आठ साल चली इस कानूनी लड़ाई के अंत में 2 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने न केवल दोनों के बीच तलाक को मंजूरी दी, बल्कि यह भी आदेश दिया कि नारायण साईं तीन महीने के भीतर जानकी देवी को दो करोड़ रुपये का स्थायी भरण-पोषण भुगतान करें। कोर्ट ने पिछले आठ वर्षों से मेंटेनेंस न दिए जाने को भी गंभीरता से लिया। मार्च 2026 में नारायण साईं को सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया और उनके बयान दर्ज किए गए। अंततः, कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया।










