मध्य प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का खुलासा
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने प्रशासन और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। इस मामले में दूसरे राज्यों के बोर्ड की संदिग्ध मार्कशीट, अत्यधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों का नाम सामने आया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी के संकेत और जांच
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित भर्ती के तहत राजगढ़ जिले में 501 आंगनवाड़ी सहायिका और 28 कार्यकर्ता पदों पर नियुक्ति होनी थी। जैसे ही दस्तावेज़ सत्यापन शुरू हुआ, फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं। महिला एवं बाल विकास विभाग के सामने ऐसे दर्जनों मामले आए, जिनमें महिलाओं ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, विदर्भ, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों के बोर्ड की मार्कशीटें प्रस्तुत कीं। ये मार्कशीटें वेबसाइट पर तो दिखाई दे रही थीं, लेकिन उनकी बनावट, भाषा और सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध थी।
संदिग्ध दस्तावेज़ों और जांच का परिणाम
जिला कार्यक्रम अधिकारी के अनुसार, आपत्ति निराकरण समिति के समक्ष कई आश्चर्यजनक मामले सामने आए, जिनसे फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। एक महिला 93 प्रतिशत अंकों की मार्कशीट लेकर आई, लेकिन वह यह भी नहीं बता सकी कि उसने 12वीं में कौन-कौन से विषय पढ़े थे। एक अभ्यर्थी ने ‘Arts’ की जगह ‘आरस’ बताया। कई महिलाएं ऐसी पाई गईं, जो सामान्य हिंदी की पंक्तियों को भी नहीं पढ़ सकीं, जबकि उनकी मार्कशीट पर 80 से 90 प्रतिशत अंक दर्ज थे। इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली गई है, और जिला शिक्षा अधिकारी को दस्तावेजों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संदिग्ध या अमान्य पाए गए आवेदनों को रद्द कर दिया गया है, और अब मेरिट सूची में दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाली महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अभ्यर्थियों को यह विकल्प भी दिया गया है कि यदि वे अपने दस्तावेजों को सही मानते हैं, तो वे जिला स्तरीय आपत्ति समिति के बाद एडीएम कोर्ट में अपील कर सकते हैं, जहां न्यायिक जांच की जा सकती है।











