अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक हरियाणा में शुरू
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ (ABPS) की महत्वपूर्ण तीन दिवसीय बैठक हरियाणा के पनीपत जिले में शुक्रवार से प्रारंभ हो रही है। इस बैठक में संघ के 100 वर्षों के कार्य विस्तार का मूल्यांकन किया जाएगा और आगामी दशकों के कार्यक्रमों एवं अभियानों की रूपरेखा भी तय की जाएगी। साथ ही, इस बैठक में 2026 और 2027 के चुनावी परिदृश्य तथा यूजीसी विवाद जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
संघ की बैठक में प्रमुख एजेंडे और संगठनात्मक योजनाएं
आरएसएस की कार्यप्रणाली में निर्णय लेने वाली इस उच्चस्तरीय संस्था की बैठक साल में केवल एक बार होती है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस बैठक का आयोजन हरियाणा के पनीपत जिले की समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में किया जा रहा है। इस दौरान संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहले ही पहुंच चुके हैं। बैठक में क्षेत्र-प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी भाग लेंगे। देशभर से संघ और उससे जुड़े संगठनों के लगभग 1487 प्रतिनिधि इस बैठक में भाग लेंगे।
बैठक के मुख्य विषय और आगामी योजनाएं
बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, सामाजिक चुनौतियों का समाधान, संगठन के विस्तार की रणनीति और आगामी योजनाओं पर गहन चर्चा होगी। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि इस बैठक में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा, अगले वर्ष की योजनाओं पर विचार-विमर्श और पिछली बैठक में तय जिम्मेदारियों की प्रगति का आकलन भी किया जाएगा।
संघ अगले एक वर्ष के लिए व्यापक योजना बनाएगा, जिसमें गृह संपर्क अभियान के तहत अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा चुका है। पिछले एक वर्ष में 5500 से अधिक नई शाखाएं भी शुरू की गई हैं। शताब्दी वर्ष के अंतर्गत पूरे देश में लगभग 97 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। बैठक के अंतिम दिन संघ के दत्तात्रेय होसबाले मीडिया को संबोधित कर प्रस्तावों और निर्णयों का विवरण साझा करेंगे। साथ ही, ‘पंच परिवर्तन’ परियोजना पर फिर से जोर दिए जाने की संभावना है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्यों को प्रोत्साहित करना है।











