हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनके परिवार ने अभी तक अंतिम संस्कार नहीं किया है। परिवार का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक वे उनके अंतिम संस्कार को नहीं करेंगे। इस घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है।
परिवार की मुख्य मांगें और न्याय की प्रतीक्षा
परिवार ने प्रशासन और सरकार के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख है कि सभी आरोपित अधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार कर निलंबित किया जाए। साथ ही, वाई पूरन कुमार की पत्नी और दो बेटियों को स्थायी सुरक्षा दी जाए। परिवार की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के साथ ही निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की भी मांग की गई है। परिवार का स्पष्ट कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
आरोप और प्रशासनिक कार्रवाई का घटनाक्रम
इस बीच, चंडीगढ़ पुलिस ने हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और 12 अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। परिवार का आरोप है कि अभी तक उनकी केवल एक ही मांग पूरी हुई है। आईएएस अमनीत पी. कुमार ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक विस्तृत पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने अपने पति के साथ हुई प्रशासनिक और जातिगत प्रताड़ना का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि वाई पूरन कुमार एक ईमानदार और साहसी अधिकारी थे, जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के लिए आवाज उठाई। परिवार का मानना है कि न्याय में देरी और प्रभावशाली अधिकारियों का संरक्षण इस मामले को जटिल बना रहा है। परिवार को डर है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें धमकियां मिल सकती हैं या झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।











