इंडिगो फ्लाइट रद्द होने पर पिता का अद्भुत साहसिक निर्णय
रोहतक के मायना गांव के निवासी राजनारायण पंघाल ने अपनी बेटी और बेटे की पढ़ाई के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय देते हुए एक अनूठा उदाहरण स्थापित किया है। जब उनकी 12वीं कक्षा में पढ़ रहे बेटे आशीष की प्री-बोर्ड परीक्षा इंदौर में होनी थी, उसी समय दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें पता चला कि इंडिगो की फ्लाइट रद्द हो गई है। इस खबर से उनकी चिंता बढ़ गई, क्योंकि परीक्षा का समय नजदीक था और वह अपने बेटे को समय पर पहुंचाना चाहते थे।
800 किलोमीटर की रातभर की ड्राइव में पिता का समर्पण
फ्लाइट रद्द होने के बाद भी, पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने तय किया कि चाहे कुछ भी हो, अपने बेटे को परीक्षा में समय पर पहुंचाना ही है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले से पता होता कि फ्लाइट रद्द हो सकती है, तो वे पहले ही कोई और व्यवस्था कर लेते। लेकिन जब उन्हें पता चला कि कोई विकल्प नहीं है, तो उन्होंने अपने वाहन में सवार होकर इंदौर की ओर रातभर ड्राइव करने का फैसला किया।
सपने और जिम्मेदारी के बीच पिता का अद्भुत संघर्ष
राजनारायण ने बताया कि जैसे ही वे एयरपोर्ट पहुंचे, उन्हें पता चला कि उनकी फ्लाइट रद्द हो चुकी है। इस खबर ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया, क्योंकि न तो ट्रेन का टिकट सुनिश्चित था और न ही बस का। बावजूद इसके, उन्होंने अपने बेटे को समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि रातभर लगातार ड्राइव करते हुए, नींद आने पर उन्होंने खुद को संभाला, पानी पीया और फिर से चल पड़े। सुबह सात बजे उन्होंने अपने बेटे को स्कूल छोड़ दिया।
उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्हें इंडिगो की मेल मिली थी जिसमें लिखा था कि उन्होंने फ्लाइट मिस कर दी है। लेकिन उन्होंने कहा कि यदि वे यह सोचते कि उन्हें 800 किलोमीटर का सफर तय करना है, तो शायद वह पूरा नहीं कर पाते। उनके अंदर से इतनी हिम्मत आई कि उन्होंने पूरी रात ड्राइव की, बस अपने बेटे का सपना और उसकी परीक्षा का ख्याल था।
राजनारायण ने बताया कि उनके बेटे के लिए यह प्री-बोर्ड परीक्षा बहुत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि जून में फाइनल परीक्षा होनी थी और बिना मार्कशीट के अगले एडमिशन या कॉलेज आवेदन नहीं हो सकते थे। इसीलिए उन्होंने कोई भी जोखिम नहीं लिया और रातभर ड्राइव कर अपने बेटे को समय पर पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि एयरलाइन ने यात्रियों को समय पर सूचित नहीं किया, जिससे कई और यात्रियों को भी परेशानी हुई। उनके अनुसार, यह साहसिक कदम उनके बेटे के भविष्य और जिम्मेदारी का प्रतीक है, और यह साबित करता है कि पिता का प्यार कितनी भी कठिनाइयों को पार कर सकता है।










