हरियाणा के आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार ने आत्महत्या की
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार ने चंडीगढ़ में अपने जीवन का अंत कर लिया। उनके नौ पन्नों के सुसाइड नोट में उन्होंने 15 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, अपमान और झूठे मुकदमों का जिक्र किया है, जो उनके जीवन को अत्यंत कठिन बना रहे थे।
सुसाइड नोट में आरोपों का खुलासा
पूरन कुमार ने अपने अंतिम पत्र में सीधे तौर पर हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और एसपी नरेंद्र बिजरानिया का नाम लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी झूठे मामलों में फंसाने के लिए बिजरानिया का दुरुपयोग कर रहे थे, ताकि उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके। कुमार ने यह भी कहा कि उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया और उनके साथ जाति आधारित उत्पीड़न का सिलसिला जारी रहा।
जातिगत उत्पीड़न और मनोवैज्ञानिक दबाव का जिक्र
कुमार ने अपने सुसाइड नोट में विस्तार से बताया कि उन्हें बार-बार गैर-मौजूद पदों पर पोस्टिंग दी गई, जिससे उनका मनोबल टूटने लगा। उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और झूठी कार्यवाहियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि पिता के निधन पर छुट्टी नहीं दी गई, जिससे उनके मन में गहरा आघात लगा। इन सभी घटनाओं ने उन्हें अंततः आत्महत्या का कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
पत्नी की शिकायत और अधिकारियों की भूमिका
घटना के बाद उनकी पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार, ने हरियाणा के डीजीपी और एसपी रोहतक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रयास किया गया। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री हरियाणा से भी संपर्क किया और इन अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही की मांग की।
आधिकारिक जांच और आरोपों का विस्तार
पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में अधिकारियों की भूमिका का विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने कहा कि डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने उनके प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में अनुचित टिप्पणी की और झूठी जानकारी फैलाने का प्रयास किया। इसके अलावा, उन्होंने फर्जी मुकदमों, धमकियों और अपमानजनक पोस्टिंग का भी उल्लेख किया।
जाति आधारित उत्पीड़न और धमकियां
कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बैचमेट्स मनोज यादव, पी.के. अग्रवाल और टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने मिलकर जाति आधारित उत्पीड़न किया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने गृह मंत्री और मुख्य सचिव को इन अत्याचारों की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही, आईपीएस अधिकारियों कुलविंदर सिंह और माटा रवि किरण ने भी उनके खिलाफ धमकियां दीं।
मामले की जांच और आगे की कार्रवाई
कुमार ने अपने अंतिम दिनों में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव से मुलाकात की और अपने ऊपर हो रहे भेदभाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस बातचीत के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि मामला मीडिया में लीक हो गया। उन्होंने अपने जीवन का अंत करने से पहले इन घटनाओं का जिक्र किया, ताकि न्याय की उम्मीद जगी रहे।











