हरियाणा पुलिस अधिकारी की आत्महत्या का मामला सामने आया
हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। इस घटना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर सहित कुल 13 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। ये वही अधिकारी हैं, जिनके नाम वाई पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में जिम्मेदार ठहराया था। यह मामला सेक्टर-11 थाने में दर्ज किया गया है। चंडीगढ़ के आईजी पुष्पेंद्र कुमार ने पुष्टि की है कि सभी नामजद अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।
सुसाइड नोट में लगाए गए गंभीर आरोप
वाई पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में जिन 13 अधिकारियों का नाम लिया है, उनमें नौ आईपीएस और दो आईएएस अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि उन्हें जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और साजिशों के माध्यम से दबाव में लाया गया। उनका कहना है कि जब न्याय की उम्मीद खत्म हो गई, तब उन्होंने यह कदम उठाया। आरोपों में शामिल अधिकारी अपने-अपने पदों पर रहते हुए उनके खिलाफ विभिन्न तरह की प्रताड़नाओं और झूठे आरोप लगाने का आरोप झेल रहे हैं।
प्रमुख आरोपों और परिवार की मांगें
वाई पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में आरोप लगाए हैं कि डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने अपने वेतन एरियर को प्रभावी रूप से 2015 से प्राप्त कर लिया, लेकिन जब उन्होंने समान आधार पर मांगा, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया गया। इसके अलावा, कई अधिकारियों पर झूठे आरोप लगाने, सरकारी आवास और वाहन के लिए अतिरिक्त शर्तें थोपने का भी आरोप है। उनके परिवार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने, उन्हें निलंबित करने, गिरफ्तारी का आदेश देने और परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
मृत्यु के बाद परिवार का दर्द और पुलिस की कार्रवाई
7 अक्टूबर को दोपहर वाई पूरन कुमार ने अपने सरकारी आवास के साउंडप्रूफ बेसमेंट में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी सारी संपत्ति पत्नी के नाम कर दी थी और उसी दिन एक सुसाइड नोट भी लिखा, जिसे उन्होंने ईमेल के जरिए अपनी पत्नी को भेजा। जब उनकी पत्नी ने फोन नहीं उठाया, तो उन्होंने बेटी से जाकर देखने को कहा। बेटी जब पहुंची, तो पिता खून से लथपथ पड़े थे, पास में रिवॉल्वर और नोट रखा था।
एफआईआर दर्ज होने के बाद हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हलचल मच गई है। हालांकि, अभी तक किसी अधिकारी ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारी अपने कानूनी सलाहकारों से राय ले रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने कहा है कि वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं और नोटिस भेजे जाएंगे। इस घटना ने प्रदेश में पुलिस महकमे की कार्यशैली और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को फिर से उजागर कर दिया है।










