हरियाणा विधानसभा में पंजाब जैसी रेत नीति की मांग तेज
पंजाब सरकार की रेत नीति की चर्चा अब हरियाणा विधानसभा में भी जोर पकड़ रही है। एक विधायक ने इस नीति को अपने राज्य में लागू करने की वकालत की है। इस संदर्भ में अरविंद केजरीवाल ने इसे गर्व का विषय बताया है, जो राज्य के किसानों और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंजाब मॉडल की सफलता और हरियाणा में उसकी जरूरत
पंजाब में बाढ़ के बाद खेतों में जमा रेत को किसान की संपत्ति मानते हुए सरकार ने इसे हटाने और बेचने की अनुमति दी है। इससे किसानों को अपने खेत साफ करने, फसल की तैयारी करने और अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिला है। इस नीति से रेत की कीमतों में लगभग तीस से पैंतीस प्रतिशत की गिरावट आई है और अवैध खनन पर भी लगाम लगी है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि पंजाब सरकार की यह पहल जमीन पर काम करने का उदाहरण है, जो दिखाता है कि इच्छाशक्ति हो तो प्राकृतिक आपदाओं के समय भी किसानों को मजबूत किया जा सकता है।
हरियाणा में स्थिति और राजनीतिक प्रतिक्रिया
वहीं, हरियाणा के कई जिलों जैसे यमुनानगर, अंबाला, करनाल, पानीपत, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, कैथल, फतेहाबाद और सिरसा में बाढ़ के कारण खेतों में भारी मात्रा में रेत और गाद जमा हो गई है। दिसंबर 2025 तक भी कई खेत खेती के योग्य नहीं बन पाए हैं, जिससे किसान रबी की फसल बोने में पीछे हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार नियम-कानून का हवाला देकर किसानों को राहत देने से कतरा रही है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि यदि पंजाब सरकार समाधान निकाल सकती है, तो हरियाणा क्यों नहीं। पार्टी का मानना है कि यह मुद्दा अब सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि किसानों के हक और सम्मान का विषय बन चुका है। पंजाब मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति हो तो प्राकृतिक आपदा के समय भी किसानों को मजबूत किया जा सकता है।











