पंजाब कांग्रेस में फिर से एकता की कोशिशें तेज
साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर से सियासी एकता की दिशा में प्रयास बढ़ते नजर आ रहे हैं। वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने अपने आवास पर एक उच्चस्तरीय डिनर का आयोजन किया, जिसमें पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मिलनसार बैठक
डिनर में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इसे केवल औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा है, बल्कि अंदरूनी मतभेदों को दूर कर साझा रणनीति बनाने का प्रयास भी माना जा रहा है। इस बैठक का मकसद पार्टी में फिर से एकता स्थापित करना और आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति बनाना है।
माझा क्षेत्र का महत्व और सियासी अनुभव
प्रताप सिंह बाजवा का संबंध माझा इलाके से है, जो पंजाब की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और पठानकोट जैसे जिलों को मिलाकर इस क्षेत्र में कुल 25 विधानसभा सीटें हैं। इसे अक्सर ‘पंथिक बेल्ट’ कहा जाता है, जहां धार्मिक प्रभाव, सीमा से जुड़ी संवेदनशीलता और ग्रामीण-शहरी वोटर का मिश्रित पैटर्न चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है। बाजवा की ग्रामीण और शहरी इलाकों में मजबूत पकड़ उन्हें पार्टी के भीतर एक भरोसेमंद नेता बनाती है।
प्रताप सिंह बाजवा का राजनीतिक अनुभव भी उल्लेखनीय है। उन्होंने 1980 के दशक में यूथ कांग्रेस से अपने करियर की शुरुआत की। वे पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं, 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में मंत्री बने, राज्यसभा सांसद भी रहे हैं और वर्तमान में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर हैं। उनका यह व्यापक अनुभव पार्टी की ताकत और रणनीति में अहम भूमिका निभाता है।










