पलवल के छांयसा गांव में स्वास्थ्य संकट और मौतों का दौर
हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव इन दिनों भय और चिंता के माहौल में डूबा हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में यहां 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस गांव में तेजी से फैल रही बीमारी ने लोगों को भयभीत कर दिया है, और अब इसे ‘मरीजों का गांव’ कहा जाने लगा है। जब भी कोई गांव में कदम रखता है, तो एक अजीब सी बेचैनी महसूस होती है।
गांव का माहौल और स्वास्थ्य संकट की भयावहता
जब आजतक की टीम ने छांयसा गांव का दौरा किया, तो गांव के बाहर लगा बोर्ड सामान्य था, जिस पर लिखा था, ‘छांयसा ग्राम पंचायत में आपका स्वागत है।’ लेकिन अंदर का दृश्य पूरी तरह से अलग था। सन्नाटा पसरा था, चेहरे पर डर साफ झलक रहा था, और हर घर में बीमारी की चर्चा हो रही थी। दो हफ्तों में हुई 20 से अधिक मौतों ने पूरे गांव में दहशत फैला दी है।
मौके पर मिली भयावह तस्वीर और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
गांव में कदम बढ़ाते ही एक किशोर लड़का मिला, जिसकी उम्र लगभग 15 से 17 साल के बीच थी। उससे पूछा गया कि क्या यही वह गांव है जहां हाल ही में कई लोगों की मौत हुई है। उसने बिना हिचक कह दिया, “हां हां, बहुत लोग मर गए यहां। यह मरीजों का गांव है।” उसके शब्दों में डर और एक कड़वी सच्चाई दोनों झलक रही थी।
आगे बढ़ते ही एक छोटी सी मेडिकल दुकान दिखी, जहां एक व्यक्ति अखबार पढ़ रहा था। उससे पूछा गया कि बीमारी का केंद्र कहां है, तो उसने कुछ पल देखा और कहा, “हर घर में एक आदमी बीमार है। क्या आप सरकारी विभाग से आए हैं?” जब यह बताया गया कि हम मीडिया से हैं, तो उसने स्वास्थ्य कैंप का रास्ता दिखाया।
गांव में लगाए गए स्वास्थ्य कैंप में भारी भीड़ जमा थी। एक ट्रक पर लिखा था ‘TB Free India’ और लोग लंबी कतारों में खड़े होकर अपने ब्लड सैंपल दे रहे थे। इस बीमारी ने पूरे गांव को डर के साए में ला खड़ा किया है। हर कोई जानना चाहता है कि यह बीमारी कैसे फैल रही है और इसका इलाज क्या है।
एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “महामारी फैल गई है।” जब उससे पूछा गया कि क्या हो रहा है, तो उसने स्थानीय बोली में जवाब दिया, “बेटा अब के करे, घने बालक बीमार पड़न लाग रहे हैं।” महिला के अनुसार, बच्चे तेजी से बीमार हो रहे हैं।
हेपेटाइटिस बी की पुष्टि और स्वास्थ्य अभियान
जब जांच में हेपेटाइटिस बी की पुष्टि हुई, तो गांव में स्क्रीनिंग अभियान तेज कर दिया गया। डॉक्टरों की टीम दवाइयां बांट रही थी और खून के नमूने ले रही थी। जब पूछा गया कि नमूने क्यों लिए जा रहे हैं, तो बताया गया कि कई ग्रामीणों में हेपेटाइटिस बी की पुष्टि हुई है, इसलिए संक्रमण की पहचान और रोकथाम के लिए यह कदम उठाया गया है।
मौके पर पहुंचते ही भीड़ जमा हो गई और लोग अपनी परेशानियों को साझा करने लगे। एक व्यक्ति ने कहा, “यह लोग अपनी जान बचाने के लिए कह रहे हैं कि हेपेटाइटिस फैला है, लेकिन असल में गंदे पानी और साफ-सफाई की कमी भी बीमारी का कारण है।” उसने गांव में बहते गंदे नालों और खराब पानी की ओर इशारा किया।
डॉक्टरों और नोडल अधिकारी वासुदेव गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध और साझा सिरिंज के माध्यम से फैलता है। कुछ ग्रामीण इन खतरनाक गतिविधियों और इंजेक्शन के जरिए संक्रमण की चपेट में आए हैं। इस दौरान एक महिला रिपोर्टर ने रोते हुए बताया कि उसने अपने 14 साल के भतीजे को खो दिया, क्योंकि समय पर इलाज नहीं मिल पाया।
मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि इलाके में कच्चे मकान, टूटी-फूटी गलियां और गंदगी का माहौल है। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, और बच्चे उसी पानी के पास खेल रहे हैं। यह तस्वीर साफ दर्शाती है कि यह सिर्फ एक बीमारी का मामला नहीं है, बल्कि खराब सफाई व्यवस्था, कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता की कमी भी इसकी मुख्य वजह हैं।
स्वास्थ्य जागरूकता और सुधार की आवश्यकता
छांयसा गांव की स्थिति यह दिखाती है कि यदि समय पर प्रशासनिक कदम नहीं उठाए गए, तो बीमारी तेजी से फैलती है और जानें जाती हैं। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं, जांच जारी है और संक्रमित लोगों की पहचान की जा रही है। लेकिन ग्रामीणों में अभी भी भय बना हुआ है। गांव को जल्द सामान्य बनाने के लिए लगातार स्वास्थ्य सहायता, जागरूकता अभियान और स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है।











