हरियाणा में सरकारी फंड घोटाले की जांच तेज
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने हरियाणा सरकार के वित्तीय संसाधनों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच अपने हाथों में ले ली है। इस मामले में 8 अप्रैल को एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। यह घोटाला हरियाणा के पंचकूला में स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) और AU स्माल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) के खातों से सरकारी धन के गबन से जुड़ा है।
फर्जी दस्तावेज और अनधिकृत लेनदेन का खुलासा
जांच में पता चला है कि इस घोटाले में फर्जी दस्तावेज, बिना अनुमति के लेनदेन और आपराधिक साजिश के माध्यम से सरकारी पैसे की हेराफेरी की गई है। इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों- आरके सिंह और प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया गया है, जबकि अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एफआईआर के अनुसार, यह घोटाला सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच लगभग पांच महीनों तक चलता रहा। इसमें मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 समेत विभिन्न विकास योजनाओं के फंड को बिना अनुमति के डायवर्ट किया गया।
मामले की जटिलता और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी डेबिट मेमो, नकली परमिशन लेटर और फाइनेंशियल रिकॉर्ड में हेरफेर कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। एक चेक पर 2.5 करोड़ रुपये अंकित थे, जबकि शब्दों में 25 करोड़ रुपये दर्ज थे, जिसे बैंक ने प्रोसेस कर दिया। पूर्व डीजी डीके बेहेरा के फर्जी हस्ताक्षर का भी प्रयोग हुआ। साथ ही, बैंकों की प्रक्रियात्मक खामियों की ओर भी ध्यान दिया गया है, जैसे अधूरे खाता खोलने के दस्तावेज और बड़े लेनदेन के अलर्ट अनधिकृत मोबाइल नंबर से जुड़े थे। AU स्माल फाइनेंस बैंक पर जांच में सहयोग न करने का आरोप भी लगा है।
इस घोटाले में शामिल फंड्स को कई शेल कंपनियों जैसे Swastik Desh Project, SRR Planning Gurus Pvt Ltd, Cap Co Fintech Services और R S Traders के माध्यम से घुमाया गया। इन कंपनियों के जरिए फर्जी एंट्री और लेनदेन दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई गई है। फरवरी 2026 में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन फंड्स के उपयोग का कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिला और पूरी प्रक्रिया को फर्जी माना गया है।
इस मामले की शुरुआत राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच से हुई थी, जिसके बाद हरियाणा सरकार ने 25 मार्च को CBI जांच की सिफारिश की। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद 8 अप्रैल को CBI ने आधिकारिक रूप से जांच शुरू कर दी। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक लगभग 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है।










