सूरत में निलंबित पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी
सूरत शहर में पुलिस की वर्दी पहनकर आतंक फैलाने वाले एक निलंबित पुलिस अधिकारी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पाल थाना पुलिस ने मुंबई (Mumbai) से निलंबित सब इंस्पेक्टर रंजीत कासले को हिरासत में लिया है, जो खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक महिला लोन एजेंट से 2.25 लाख रुपये और मोबाइल फोन लूटने का आरोप है। यह बात खास है कि इस आरोपी के खिलाफ मुंबई के विभिन्न थानों में पहले से ही सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, बावजूद इसके वह बिना डर के अपराध करता रहा।
आरोपी का आपराधिक इतिहास और नई वारदात
एसीपी दीप वकील ने बताया कि रंजीत कासले को मुंबई पुलिस ने अप्रैल 2025 में निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद, उसने अपने पुराने पुलिसिया रुतबे का इस्तेमाल कर सूरत में नई आपराधिक गतिविधि को अंजाम दिया। सूरत पुलिस अब उसके पांच फरार साथियों की तलाश में जुटी है। यह मामला तब सामने आया जब आरोपी ने एक महिला लोन एजेंट से धोखे से 2.25 लाख रुपये और मोबाइल छीन लिया।
कैसे हुई लूट और फर्जी पहचान का खुलासा
दरअसल, सूरत के जहांगीराबाद इलाके की रहने वाली 28 वर्षीय सुजल बेन पादरिया को 14 अक्टूबर को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर रंजीत बताया और लोन से जुड़ी व्यवसायिक बातचीत के बहाने मिलने का प्रस्ताव दिया। अगले दिन, सुजल बैंक से रकम निकालकर इस्कॉन सर्कल पहुंचीं, जहां आरोपी ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर अपना फर्जी पहचान पत्र दिखाया। कुछ ही मिनटों में उसके पांच साथी भी वहां पहुंच गए और धमकाते हुए लूटपाट की।
फर्जी पुलिस की करतूत और गिरफ्तारी
रंजीत ने सुजल का 2.25 लाख रुपये और मोबाइल फोन छीन लिया, साथ ही उसके साथी भूपेंद्रभाई मिस्त्री से 15 हजार रुपये का मोबाइल भी लूट लिया। बीच-बचाव करने पर भूपेंद्र को थप्पड़ मारा गया। इसके बाद, रंजीत ने दोनों को अपनी कार में बिठाया और कहा कि उन्हें अडाजण पुलिस स्टेशन ले जा रहा है। लेकिन कुछ दूरी पर पहुंचकर वह उन्हें छोड़कर फरार हो गया। सीसीटीवी फुटेज में पूरी घटना कैद हो गई, जिसके आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच कर रंजीत को महाराष्ट्र (Maharashtra) से गिरफ्तार कर लिया।
अपराधी का आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस का कदम
रंजीत कासले न केवल सूरत में बल्कि मुंबई (Mumbai) में भी कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है। उसके खिलाफ लूट, धोखाधड़ी, जबरन वसूली और हिंसा जैसे गंभीर अपराधों के सात मामले दर्ज हैं। निलंबन के बावजूद, वह अपने पुलिसिया रुतबे का दुरुपयोग करता रहा। अब सूरत पुलिस उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस फर्जी पुलिस गिरोह के नेटवर्क का भी पर्दाफाश करने का प्रयास कर रही है। पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से इस तरह के अपराधों का अंत संभव हो सकेगा।











