यमुना नदी की सफाई के लिए नई तकनीक का प्रयोग
सरकार ने यमुना नदी की प्रदूषण नियंत्रण और दिल्ली की बाढ़ रोकथाम प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नजफगढ़ ड्रेन, जो यमुना में लगभग 70 प्रतिशत प्रदूषित जल का स्रोत है, अब अत्याधुनिक तकनीक से साफ किया जाएगा। इस नई पहल में वॉटरमास्टर नामक एम्फीबियन मल्टीपरपज़ ड्रेजर और तीन हॉपर बार्ज का उपयोग किया जाएगा। यह कदम यमुना की स्वच्छता के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है, जो सतत और तकनीक आधारित समाधान प्रदान करेगा।
उद्घाटन और तकनीकी विशेषताएँ
इस हाई-टेक ड्रेजिंग उपकरण का उद्घाटन सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया। फिनलैंड से आयातित वॉटरमास्टर ड्रेजर सूखी जमीन से लेकर छह मीटर गहरे पानी तक कार्य करने में सक्षम है। यह न केवल ड्रेजिंग करता है, बल्कि रेकिंग, पाइलिंग, गाद हटाने और जलीय खरपतवार तथा हायसिंथ की सफाई भी कर सकता है। इसकी एम्फीबियन तकनीक के कारण यह जमीन और पानी दोनों स्थानों पर आसानी से काम कर सकता है।
ड्रेजर की विशेषताएँ और लागत
इस ड्रेजर में चार स्थिराइजर, 180 डिग्री घूमने वाला एक्सकेवेटर आर्म और 600 लीटर क्षमता का बैकहो बकेट शामिल है। साथ ही, इसमें जीपीएस ट्रैकिंग और फ्यूल सेंसर लगे हैं, जो कार्य की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं। यह मशीन प्रति घंटे लगभग 600 क्यूबिक मीटर गाद निकालने में सक्षम है और इसे डेढ़ किलोमीटर तक पहुंचाया जा सकता है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 803.78 लाख रुपये है। सफाई को और प्रभावी बनाने के लिए तीन स्वचालित हॉपर बार्ज भी तैनात किए गए हैं, जो गाद, हायसिंथ और तैरते कचरे को तेजी से हटाने में मदद करेंगे। मंत्री ने कहा कि यदि हम यमुना की सफाई को लेकर गंभीर हैं, तो नजफगढ़ ड्रेन का तकनीकी रूप से साफ-सफाई आवश्यक है। भविष्य में इसी तरह की मशीनें अन्य ड्रेनों में भी लगाई जाएंगी ताकि दिल्ली की जल व्यवस्था प्रदूषण मुक्त और सुचारू बनी रहे।










