यमुना नदी की प्रदूषण स्थिति पर राजनीतिक विवाद तेज
छठ पर्व के दौरान यमुना नदी की जल गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा पर यमुना में प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया था, लेकिन अब जब दिल्ली में भाजपा की सरकार है, तो आम आदमी पार्टी ने इसका जवाब दिया है। इस बीच, नदी की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए इंडिया टुडे और आजतक ने जल विशेषज्ञ डॉ. नूपुर बहादुर से चर्चा की।
जल विशेषज्ञ का विश्लेषण: झाग और नदी की सेहत
डॉ. नूपुर बहादुर एनएमसीजी टेरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन वॉटर रीयूज में वरिष्ठ फेलो और निदेशक हैं। वे पिछले बीस वर्षों से नदी पुनर्जीवन, अपशिष्ट जल उपचार और जल पुन: उपयोग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि यमुना में बनने वाला झाग या फ्रॉथ नदी के प्रदूषण का संकेतक है। झाग का निर्माण प्रक्रिया का अध्ययन कर हम नदी की समग्र जल गुणवत्ता का आकलन कर सकते हैं।
यमुना की सफाई और सुधार के प्रयास
डॉ. बहादुर ने कहा कि झाग बनना केवल यमुना में ही नहीं, बल्कि यूरोप की कई नदियों और झीलों में भी देखा गया है। यह प्राकृतिक और रासायनिक दोनों तरह की प्रक्रियाओं का परिणाम है। यमुना के प्रदूषण के मुख्य कारणों में बिना उपचार के सीवेज, अमोनिया छोड़ने वाले एसटीपी, औद्योगिक क्षेत्र जो बिना एसटीपी के गंदा पानी नदी में छोड़ते हैं, और अनधिकृत डाईंग यूनिट्स शामिल हैं। जलकुंभी और धोबी घाटों से निकलने वाले रासायनिक पदार्थ भी झाग बनने में भूमिका निभाते हैं।
सुधार की दिशा में उठाए गए कदम
डॉ. बहादुर ने बताया कि जब पानी का प्रवाह तेज होता है और प्रदूषण अधिक होता है, तब झाग बनता है। उन्होंने कहा कि फीकल कोलीफॉर्म प्रदूषण का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में तीन से चार गुना कम हुआ है। सरकार ने पिछले साल छठ के बाद कई सिफारिशें लागू की हैं, जिनके कारण यमुना में सुधार दिखने लगा है। कलिंदी कुंज से जलकुंभी हटा दी गई है और इसकी सफाई हर तीन महीने में की जाती है।
प्रयास और चुनौतियां
डॉ. बहादुर ने बताया कि कई नालों को एसटीपी की ओर मोड़ा गया है ताकि केवल साफ पानी ही नदी में छोड़ा जाए। यमुना के पुनर्जीवन के लिए सभी प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करना आवश्यक है। यह प्रक्रिया लंबी है, लेकिन सही दिशा में शुरुआत हो चुकी है। नदी का पीएच स्तर सामान्य सीमा में है, लेकिन डाईंग यूनिट्स का गंदा पानी कभी-कभी इसे प्रभावित कर देता है। तलछट की सफाई और नालों का डायवर्टेशन जारी है। यदि यह प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो यमुना को पूरी तरह स्वच्छ होने में लगभग तीन से पांच साल का समय लगेगा।











