इंफोसिस का नया कदम: घर की बिजली खपत का डेटा संग्रह
प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस ने अपने हाइब्रिड वर्क मॉडल के तहत काम कर रहे कर्मचारियों से अब उनके घर की बिजली खपत से जुड़ी जानकारी मांगी है। कंपनी का उद्देश्य है कि अपने पर्यावरणीय प्रभाव का सटीक आकलन किया जा सके। इस पहल का मकसद कंपनी के कुल कार्बन उत्सर्जन में घर से काम करने वाले कर्मचारियों की बिजली खपत को भी शामिल करना है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए नई पहल और कर्मचारियों का सहयोग
इंफोसिस ने यह जानकारी कर्मचारियों को एक आंतरिक ईमेल के माध्यम से दी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि घर से काम के दौरान उपयोग होने वाली बिजली भी कंपनी के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का हिस्सा मानी जाएगी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) जयेश संघराजका ने बताया कि जब से हाइब्रिड वर्क मॉडल स्थायी रूप से लागू हुआ है, तब से पर्यावरण पर प्रभाव सिर्फ ऑफिस परिसर तक सीमित नहीं रहा। घर में उपयोग हो रही बिजली को भी इस रिपोर्टिंग में शामिल करना जरूरी हो गया है।
सर्वे में कर्मचारियों से क्या पूछा जा रहा है?
इस सर्वे के तहत कर्मचारियों से उनके घर की बिजली खपत, लैपटॉप, मॉनिटर, इंटरनेट डिवाइस जैसे उपकरणों का उपयोग और ऊर्जा बचाने के उपायों के बारे में जानकारी मांगी जा रही है। कंपनी का कहना है कि यह प्रक्रिया सरल है और मुख्य उद्देश्य है कि उत्सर्जन से संबंधित सही डेटा प्राप्त किया जा सके। कर्मचारियों से सहयोग की अपील की गई है ताकि कंपनी अपनी रिपोर्टिंग को और अधिक सटीक और प्रभावी बना सके।
यह कदम कंपनी की पर्यावरण स्थिरता योजनाओं का ही हिस्सा है, जो पिछले 15 वर्षों से चल रही हैं। पहले इन योजनाओं का फोकस केवल ऑफिस कैंपस से होने वाले उत्सर्जन पर था, लेकिन अब घर से काम करने की व्यवस्था को भी इसमें शामिल किया गया है। कोरोना महामारी के बाद भी इंफोसिस ने हाइब्रिड वर्क सिस्टम को जारी रखा है, जिसमें कर्मचारियों की ऑफिस उपस्थिति ऑटोमेटेड सिस्टम से ट्रैक की जाती है। यदि कोई कर्मचारी तय दिनों से अधिक घर से काम करना चाहता है, तो उसे अपने मैनेजर से अनुमति लेनी होती है।










