सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया की याचिका पर सुनवाई की
सुप्रीम कोर्ट ने आज शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की उस याचिका पर विचार किया, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत दर्ज एक मामले से संबंधित है। इस सुनवाई की अध्यक्षता न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने की।
मजीठिया के वकील ने दी महत्वपूर्ण दलीलें
मजीठिया के वरिष्ठ वकील और पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट जज एस. मुरलीधर ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को पहले ही एनडीपीएस (NDPS) मामले में जमानत मिल चुकी है। राज्य सरकार ने उस जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (Special Leave Petition) दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
क्या है मजीठिया के खिलाफ नई कानूनी कार्रवाई का आधार?
मुरलीधर ने बताया कि इसी मामले में राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में एक पूरक हलफनामा दाखिल कर दावा किया कि एनडीपीएस केस में मिली धनराशि से जुड़ा साक्ष्य मिला है। उन्होंने तर्क दिया कि इसी वित्तीय लेनदेन के आधार पर अब एक नया मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया था, यह कहते हुए कि अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। लेकिन चार दिन बाद ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई। साथ ही, अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है, पर मजीठिया के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है, जो अनुचित है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी किया है, जिसे चार सप्ताह में वापस लेने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी, और प्रतिवादी पक्ष को काउंटर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति भी दी गई है।










