2020 दिल्ली दंगों से जुड़े साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली दंगों से संबंधित साजिश के आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विस्तार से सुनवाई की। इस दौरान अदालत में तीन मुख्य आरोपियों-गुलफिशा फातिमा, उमर खालिद और शरजील इमाम-की ओर से वकीलों ने ट्रायल में हो रही लंबी देरी और UAPA (यूनाइटेड एंटी टेररिस्ट फोर्स एक्ट) की कठोर धाराओं के अनुचित उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।
अधिवक्ताओं ने ट्रायल और जेल में लंबी अवधि पर उठाए सवाल
गुलफिशा फातिमा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनकी मुवक्किल लगभग छह वर्षों से जेल में हैं। 16 सितंबर 2020 को मुख्य चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन जांच एजेंसियां लगातार सप्लीमेंट्री चार्जशीट प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अब तक चार सप्लीमेंट्री और एक मुख्य चार्जशीट फाइल हो चुकी है, लेकिन ट्रायल शुरू होने का कोई संकेत नहीं है। सिंघवी ने कहा, “बिना सजा के इतनी लंबी कैद हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का मजाक है। यह प्री-ट्रायल सजा जैसी स्थिति है।” उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को दी गई जमानत का उदाहरण देते हुए कहा कि ये दोनों आरोपियों भी गंभीर आरोपों में जेल में हैं, जबकि गुलफिशा उस WhatsApp ग्रुप (DPSG) की सदस्य नहीं थीं। उन्होंने तर्क दिया कि अब 32 वर्षीय महिला को UAPA के तहत जेल में रखना उचित नहीं है।
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत और लंबी जेल अवधि
उमर खालिद के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि खालिद 13 सितंबर 2020 से अब तक यानी लगभग पांच साल तीन महीने से जेल में हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस की दलील केवल यह है कि खालिद ने 17 फरवरी 2020 को महाराष्ट्र में भाषण दिया था। सिब्बल ने कोर्ट में उस भाषण का वीडियो भी चलाया, जिसमें कहा गया कि यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर आधारित था और इसमें हिंसा या नफरत फैलाने का कोई संकेत नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में जानबूझकर देरी की गई और पुलिस ने चार्ज पर बहस शुरू होने से पहले ही बार-बार कहा कि जांच पूरी नहीं हुई है। यदि जमानत नहीं मिली, तो खालिद को बिना ट्रायल के आठ साल तक जेल में रहना पड़ेगा।
शरजील इमाम के वकील सिद्धार्थ दबे ने कहा कि सरकार ने उन्हें खतरनाक इंटेलेक्चुअल टेररिस्ट का लेबल दिया है, जबकि अभी तक उन्हें किसी भी मामले में सजा नहीं मिली है। उनके अनुसार, भाषणों के अलावा साजिश का कोई सीधा सबूत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में ट्रायल की देरी और UAPA के दुरुपयोग पर विस्तार से सुनवाई कर रहा है, जिसकी अगली प्रक्रिया बुधवार को होगी।










