कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को मिली जमानत
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें टेरर फंडिंग से जुड़े एक अन्य मामले में जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया था।
शब्बीर शाह को 12 मार्च को ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि यह मामला कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने से संबंधित है। इस मामले की जांच कई वर्षों से चल रही है और अदालत में इसकी सुनवाई अभी भी लंबित है।
आरोप और जांच का विवरण
NIA ने 4 अक्टूबर 2019 को अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शाह को आरोपी बनाया। आरोप है कि उन्होंने जम्मू और कश्मीर में देश विरोधी अलगाववादी आंदोलन को समर्थन देने के लिए मुठभेड़ों में मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को श्रद्धांजलि देने के नाम पर हवाला के जरिए धन प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्होंने LOC ट्रेड के माध्यम से फंड जुटाने में भी भूमिका निभाई।
इस धन का इस्तेमाल विध्वंसक, हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पखवाड़े इस मामले में लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में देरी को लेकर गंभीर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा कि यह मुकदमा अपेक्षा से अधिक समय से लंबित है और आरोपी जेल में हैं।
जमानत शर्तें और आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में शब्बीर शाह को जमानत देते समय कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। उन्हें जेल से बाहर आने के बाद बिना अनुमति दिल्ली से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही उनका पासपोर्ट जमा कराना अनिवार्य है और उन्हें नियमित रूप से NIA को रिपोर्ट करनी होगी।
शाह को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे इस मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित न करें और मीडिया में केस से संबंधित कोई बयान न दें। पटियाला हाउस कोर्ट में बेल बॉन्ड भरने और सभी शर्तें पूरी करने के बाद, यदि किसी अन्य केस में उनकी हिरासत का आदेश नहीं है, तो उन्हें रिहा किया जा सकता है। यदि किसी अन्य मामले में गिरफ्तारी या वारंट है, तो रिहाई में देरी हो सकती है या शर्तें पूरी न होने पर रुकावट आ सकती है।











