लाल किले के पास धमाके का खुलासा: आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश
सोमवार को लाल किले के पास हुए विस्फोट की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस धमाके के पीछे की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन डॉक्टरों समेत कुल आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। साथ ही, जांच में 2900 किलो विस्फोटक भी जब्त किया गया है, जो इस घटना की गंभीरता को दर्शाता है। अब तक की जांच में कई संदिग्ध किरदारों का पता चल चुका है, जो इस आतंकी साजिश के पीछे छिपे हुए थे।
धमाके में शामिल मुख्य संदिग्ध और उसकी भूमिका
धमाके में मुख्य भूमिका निभाने वाले उमर नामक व्यक्ति उस कार में सवार था, जिसमें विस्फोट हुआ। वह पिछले दो वर्षों से फरीदाबाद के अल-फलाह अस्पताल में डॉक्टर के रूप में कार्यरत था। दो महीने पहले वह कश्मीर से आया था, और परिवार का कहना है कि उसे इन गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी नहीं थी। पुलिस का मानना है कि उमर ने साथी गिरफ्तार होने के बाद घबराहट में यह धमाका किया। उसकी कार का मालिकाना हक उसके नाम पर था, जिसे तारिक से खरीदा गया था। अब डीएनए टेस्ट से पुष्टि की जाएगी कि वह ही उस कार में था और उसने आत्मघाती हमला किया है। उसकी मां शमीमा बानो, भाई आशिक और जहूर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
कश्मीर से लेकर फरीदाबाद तक का आतंकी नेटवर्क
दूसरे मुख्य आरोपी डॉ आदिल राठर का संबंध कश्मीर के कुलगाम जिले से है। उसने GMC श्रीनगर से MBBS की डिग्री प्राप्त की और अनंतनाग मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम कर रहा था। अक्टूबर महीने में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाने की जांच शुरू होने के बाद से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके लॉकर से AK-47 राइफल भी बरामद की, जिससे पता चलता है कि वह इस आतंकी साजिश का मास्टरमाइंड था। टेलीग्राम पर रैडिकलाइजेशन और फंडिंग में उसकी भूमिका भी सामने आई है।
तीसरे आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल का घर से 2900 किलो विस्फोटक और हथियार बरामद हुए हैं। यह 35 वर्षीय MBBS डॉक्टर फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। वह फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर टगा में किराए के मकान में रहता था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाने के मामले में वांटेड घोषित किया था। वह व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसमें पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स रैडिकलाइज होकर पाकिस्तान से संचालित टेलीग्राम चैनल्स और क्रिप्टो के जरिए फंडिंग प्राप्त कर रहे थे।
श्रीनगर और लखनऊ से जुड़े अन्य संदिग्ध
श्रीनगर में पूछताछ के दौरान डॉ शाहीन का भी नाम सामने आया है, जो लखनऊ के लाल बाग की रहने वाली है। वह अल-फलाह अस्पताल में काम कर रही थी और 9 नवंबर को फरीदाबाद में गिरफ्तार हुई। उसकी कार से AK-47 राइफल, मैगजीन, पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए हैं। इस कार का इस्तेमाल मुजम्मिल कर रहा था।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा से डॉ सज्जाद अहमद माला को हिरासत में लिया है। यह छठा बड़ा कदम है, जिसमें पहले उत्तर प्रदेश से एक और डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का मानना है कि ये सभी संदिग्ध एक जटिल आतंकी नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो पाकिस्तान से फंडिंग और निर्देश प्राप्त कर रहा था।
यूपी एटीएस ने फरीदाबाद में गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन अंसारी के भाई परवेज अंसारी को भी हिरासत में लिया है। उसकी गिरफ्तारी लखनऊ में हुई, और उससे पूछताछ जारी है। जांच में पता चला है कि परवेज की गाड़ी लखनऊ में रजिस्टर्ड थी, और धमाके के बाद दोनों के बीच हुई कॉल का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। इस पूरी जांच का उद्देश्य इस आतंकी साजिश के पीछे छिपे नेटवर्क का पर्दाफाश करना है।










