दिल्ली के खेल मैदान की हकीकत: खेलों को बढ़ावा देने का दावा खोखला
दिल्ली में खेलों को प्रोत्साहित करने के नाम पर किए गए दावों की पोल खुल रही है, खासकर मैदानगढ़ी में। यहां जिस जमीन पर डीडीए (Delhi Development Authority) ने देश का पहला रग्बी स्टेडियम बनाने का वादा किया था, आज वहां एक सामान्य पार्क ही मौजूद है। न तो गोलपोस्ट हैं, न ही हरियाली, न पानी और न ही शौचालय की सुविधा।
खेल मैदान में सुविधाओं का अभाव और खिलाड़ियों की परेशानी
खिलाड़ियों ने बताया कि इस मैदान पर शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है। एक खिलाड़ी ने कहा, “यह न केवल अपमानजनक है बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक है।” साथ ही, पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में इस मैदान पर दक्षिण दिल्ली के लगभग 500 से 1000 छात्र और खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं।
सपनों का स्टेडियम या सिर्फ पार्क का हकीकत
गौतम डागर ने बताया कि कोविड के बाद इस मैदान का उद्घाटन उन्होंने और उनकी पत्नी, अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी नेहा परदेसी, ने किया था। उन्होंने कहा, “उस समय इसे रग्बी खिलाड़ियों के लिए समर्पित किया गया था, लेकिन अब यह सिर्फ एक पार्क बनकर रह गया है।” दिल्ली रग्बी एसोसिएशन के अध्यक्ष मिथुन गौर ने कहा कि बुनियादी ढांचे की कमी का सीधा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ा है। उन्होंने कहा, “2022 के नेशनल गेम्स में हमने कांस्य पदक जीता था, यदि सुविधाएं बेहतर होतीं तो स्वर्ण पदक भी मिल सकता था।”
जब टीम ने मैदानगढ़ी का दौरा किया, तो एक ओर लोग टहलते दिखे, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ी बिना गोलपोस्ट और असमतल सतह पर अभ्यास कर रहे थे। इस मुद्दे पर डीडीए और उद्घाटन के समय मौजूद रहे पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी और वर्तमान सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी से संपर्क किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
उभरते खेलों को प्रोत्साहित करने के दावों के बीच मैदानगढ़ी की यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। क्या बुनियादी सुविधाओं के बिना खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे? जवाब का इंतजार करते हुए दिल्ली के रग्बी खिलाड़ी उसी मैदान पर अभ्यास करने को मजबूर हैं, जो यादों में स्टेडियम है, लेकिन कागजों में सिर्फ एक पार्क है।









