दिल्ली में प्रदूषण का असली कारण और हवा का रुख
दिल्ली में हाल के दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली सुधार देखने को मिला है, लेकिन यह सुधार सतही है। OSINT टीम के विश्लेषण से पता चला है कि हवा का दिशा परिवर्तन दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। हवाओं की दिशा बदलने से प्रदूषित हवा पंजाब और हरियाणा की ओर लौट रही है, जिससे दिल्ली में हवा स्वच्छ दिखने लगी है।
पराली का धुआं और हवा का प्रवाह
इस बदलाव के कारण पराली का धुआं सीधे दिल्ली की ओर आने के बजाय पंजाब और हरियाणा की ओर वापस लौट गया है। इस वजह से दिल्ली में अस्थायी रूप से वायु प्रदूषण कम दिखाई दे रहा है, जबकि पराली जलाने की घटनाएं अभी भी जारी हैं। Copernicus के ERA5 प्रोजेक्ट के आंकड़ों के आधार पर बनाए गए एनिमेशन में भी यह स्पष्ट हुआ है कि हवाएं अब उत्तर की ओर मुड़ रही हैं, जिससे धुआं हरियाणा और पंजाब के ऊपर मंडरा रहा है।
डेटा में खामियां और प्रदूषण का वास्तविक स्तर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। आने वाले दिनों में आसमान साफ हो सकता है, लेकिन यह केवल प्राकृतिक राहत है, न कि प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान। इंडिया टुडे की जांच में यह भी सामने आया है कि 96 घंटे के डेटा में स्टेशनों का गायब होना एक बड़ी समस्या है। खास बात यह है कि डेटा ज्यादातर प्रदूषित घंटों के दौरान ही गायब था, जिससे दिल्ली की हवा की वास्तविक स्थिति छुप गई।
उदाहरण के तौर पर, PM2.5 डेटा का अध्ययन दर्शाता है कि अधिकांश स्टेशनों ने दोपहर 12 से 3 बजे तक ही रिकॉर्डिंग की, जब हवा अपेक्षाकृत साफ होती है। वहीं सुबह 7 से 11 बजे और रात 2 बजे का डेटा सबसे अधिक गायब रहा, जो वे समय हैं जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है। इस पैटर्न के कारण AQI कम दिखा, जिससे हवा साफ़ होने का भ्रम पैदा हुआ, जबकि हकीकत में प्रदूषण का स्तर कहीं अधिक था।










