फांसी घर और टिफिन रूम विवाद पर राजनीतिक और कानूनी जंग तेज
दिल्ली में फांसी घर को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और कानूनी स्तर पर तीव्र हो गया है। विधानसभा सचिवालय का आरोप है कि आम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं पर जांच से बचने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि केजरीवाल और सिसोदिया इसे असंवैधानिक कदम बताते हुए खारिज कर रहे हैं। स्पीकर गुप्ता द्वारा इसे ‘टिफिन रूम’ कहने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है।
विधायक और समिति के बीच टकराव की जड़ें
दिल्ली विधानसभा सचिवालय के वकील जयंत मेहता ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता लगातार सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे एक भी बार समिति के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। कोर्ट ने भी यह सुनिश्चित किया कि इस मामले में अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया है। वहीं, केजरीवाल और सिसोदिया ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि समिति को भेजा गया मामला केवल ‘प्रामाणिकता’ जांचने के लिए है, जो विधानसभा की शक्तियों के दायरे में नहीं आता।
आरोप और विवाद की मुख्य बातें
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस कार्रवाई का अधिकार क्षेत्र से बाहर होना, प्रक्रिया में खामियां और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। विधानसभा ने पहले इस याचिका को गलत ठहराया था और कहा था कि इसे विशेषाधिकार भंग का मामला नहीं माना जाना चाहिए। समिति का उद्देश्य केवल ‘फांसी घर’ की सच्चाई जानना है, जिसे 22 अगस्त 2022 को केजरीवाल, सिसोदिया, राखी बिड़ला और स्पीकर गोयल की मौजूदगी में उद्घाटित किया गया था। AAP का तर्क है कि यह स्मारक स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का प्रतीक है। स्पीकर गुप्ता ने 1912 के नक्शे का हवाला देते हुए कहा कि इस जगह को कभी ‘फांसी घर’ के रूप में इस्तेमाल किए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं है, और इसी जांच के लिए मामला समिति को भेजा गया है।









