दिल्ली में कृत्रिम वर्षा का ट्रायल: क्या रहा परिणाम?
राजधानी दिल्ली में आज क्लाउड सीडिंग तकनीक का प्रयोग कर कृत्रिम वर्षा का परीक्षण किया गया। इस ट्रायल के तीन घंटे बीत जाने के बाद भी शहर के किसी भी क्षेत्र में बारिश की कोई पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का दावा था कि यह प्रक्रिया 15 मिनट से लेकर चार घंटे के बीच परिणाम दिखा सकती है, लेकिन अभी तक आसमान साफ ही नजर आ रहा है।
क्लाउड सीडिंग के लिए आवश्यक परिस्थितियां और वर्तमान स्थिति
क्लाउड सीडिंग के सफल प्रयोग के लिए सही मौसम और नमी की मौजूदगी जरूरी होती है। दिल्ली में इस समय तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम है, जिससे नमी की मात्रा कम हो रही है। इस कारण से बादलों में नमी की कमी के कारण बारिश की संभावना फिलहाल टली हुई है। दिल्ली सरकार ने बताया कि इस प्रक्रिया में आठ फ्लेयर्स का इस्तेमाल किया गया, जिनमें से प्रत्येक लगभग दो मिनट तक सक्रिय रहता है।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ और अधिकारी?
मंत्री मनजिंदर सिरसा ने बताया कि इस ट्रायल में 2.5 किलोग्राम वज़न का एक फ्लेयर प्रयोग में लाया गया। इस प्रक्रिया में लगभग आधे घंटे का समय लगा। हालांकि, अभी तक कोई प्रभावी परिणाम नहीं दिखा है। सौरभ भारद्वाज ने भी कहा कि देवताओं की कृपा के बिना वर्षा संभव नहीं है, और वर्तमान में बादल भी नजर नहीं आ रहे हैं। इस तरह के प्रयोगों का उद्देश्य जल संकट से निपटना है, लेकिन अभी तक सफलता की कोई पुष्टि नहीं हुई है।











